Silver Scam: कान्हा की नगरी में भरोसे पर भारी पड़ा लालच, 75 करोड़ की चांदी लेकर कारोबारी फरार, पुलिस जांच तेज

मथुरा में 10 कारोबारी 2500 किलो चांदी लेकर फरार हो गए। 75 करोड़ के इस घोटाले से सराफा बाजार में हड़कंप है। पुलिस ने कई टीमें बनाकर जांच शुरू कर दी है।

Mathura Silver Scam Shocks Market: मथुरा में सराफा बाजार इन दिनों भारी तनाव में है। शहर के सराफा कारोबार से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां भरोसे के नाम पर 10 कारोबारी करीब 2500 किलो चांदी लेकर फरार हो गए। इस चांदी की अनुमानित कीमत लगभग 75 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस घटना के सामने आते ही पूरे सराफा जगत में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि मथुरा के करीब चार दर्जन सराफा व्यापारियों ने वर्षों से चले आ रहे आपसी विश्वास के आधार पर इन कारोबारियों को चांदी दी थी। ये कारोबारी चांदी को दूसरे जिलों और राज्यों की मंडियों में बेचते थे और समय पर भुगतान करते थे। लेकिन दिसंबर महीने में चांदी लेने के बाद अचानक उनका संपर्क टूट गया। पहले टालमटोल होती रही, फिर मोबाइल फोन भी बंद हो गए।

एसएसपी ने सौंपी जांच, कई टीमें गठित

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी श्लोक कुमार ने जांच की जिम्मेदारी एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह को सौंप दी है। साथ ही शहर की पुलिस और एलआईयू को मिलाकर गोपनीय जांच भी शुरू कराई गई है। कुल आठ पुलिस टीमें बनाई गई हैं, जिनमें से कुछ राजस्थान और हरियाणा के लिए रवाना हो चुकी हैं।

पुलिस के अनुसार, कुछ संदिग्ध कारोबारियों की लोकेशन ट्रेस कर ली गई है। माना जा रहा है कि यह पूरा मामला पहले से सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है।

किसका नाम आया सामने

इस मामले में वृंदावन निवासी कारोबारी दिनेश अग्रवाल का नाम भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, वह राजस्थान के उदयपुर की मंडी में चांदी बेचने का काम करता था। दिसंबर में वह सराफा व्यापारियों से चांदी लेकर उदयपुर गया और वहां से लापता हो गया। उसके परिवार ने उदयपुर में उसकी गुमशुदगी भी दर्ज कराई है। पुलिस जांच में उसकी आखिरी लोकेशन हरियाणा में मिली है। इसी आधार पर पुलिस की तीन टीमें हरियाणा और राजस्थान में दबिश देने गई हैं।

पुलिस को जांच में आ रही मुश्किलें

पुलिस के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि सराफा व्यापारी चांदी से जुड़े ठोस सबूत पेश नहीं कर पा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बड़े स्तर पर चांदी का लेनदेन केवल कागजों पर लिखा जाता है। कई बार न तो जीएसटी के बिल होते हैं और न ही पक्के दस्तावेज। इसी वजह से कुछ व्यापारी पुलिस के सामने खुलकर आने से भी हिचक रहे हैं। हालांकि, कुछ सराफा व्यापारियों ने लिखित शिकायत दी है, जिसके आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

सच्चाई कारोबारियों की गिरफ्तारी के बाद ही सामने आएगी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक आरोपी कारोबारी पकड़े नहीं जाते, तब तक पूरे मामले की सच्चाई सामने आना मुश्किल है। फिलहाल पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है और सराफा व्यापारियों से भी सहयोग की अपील की जा रही है।

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