Mayawati ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर zen Z को किससे सावधान रहने की अपील की, BJP-RSS पर साधा निशाना

मायावती ने छात्रों और Gen Z से राजनीतिक दलों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने BJP और कांग्रेस पर आंदोलन को राजनीतिक फायदे के लिए प्रभावित करने का आरोप लगाया और युवाओं से स्वतंत्र आवाज उठाने को कहा।

Mayawati Press Conference

BSP Stand : बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने मंगलवार को छात्रों और Gen Z के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युवाओं के विरोध-प्रदर्शन को BJP और कांग्रेस अपने राजनीतिक हितों के लिए प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। मायावती ने छात्रों से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक दल के बहकावे में न आएं और अपने मुद्दों को लेकर स्वतंत्र रूप से आवाज उठाएं।

छात्रों के आंदोलन पर बोलीं मायावती

मायावती ने कहा कि देश में छात्र और युवा लगातार अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना था कि इन आंदोलनों के पीछे उठाए जा रहे सवालों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे अपने आंदोलन को राजनीतिक फायदे का जरिया न बनने दें। इसी मुद्दे पर RSS प्रमुख मोहन भागवत भी हाल में छात्रों के विरोध को वास्तविक समस्याओं से जुड़ा बता चुके हैं।

आरक्षण पर भी घेरा

मायावती इससे पहले RSS प्रमुख की आरक्षण से जुड़ी टिप्पणी पर भी सवाल उठा चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि RSS की सोच सामाजिक न्याय और आरक्षण के मुद्दे पर विरोधाभासी रही है। मायावती ने सरकार से आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की थी और इसे संविधान से मिले अधिकारों से जोड़कर देखा।

 BJP-कांग्रेस दोनों पर हमला

मायावती के ताजा बयान में BJP के साथ कांग्रेस भी निशाने पर रही। उन्होंने कहा कि युवाओं के आंदोलन को किसी राजनीतिक पार्टी के हित में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनका संदेश साफ था कि छात्र अपने मुद्दों को केंद्र में रखें और राजनीतिक दलों के दबाव से अलग रहकर अपनी बात सामने रखें।

यूपी की सियासत में हलचल

मायावती के बयान को उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। BSP लंबे समय से सामाजिक न्याय, आरक्षण और दलित-पिछड़े वर्गों के अधिकारों को अपने राजनीतिक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बनाती रही है। ऐसे समय में जब छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बने हुए हैं, मायावती का यह बयान BSP की राजनीतिक रणनीति का संकेत भी माना जा सकता है।

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