गणतंत्र दिवस पर मायावती का प्रहार: कांशीराम के लिए भारत रत्न की मांग और सरकारी दावों को बताया ‘भूलभुलैया’

गणतंत्र दिवस पर मायावती ने कांशीराम के लिए भारत रत्न की मांग उठाते हुए सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकारी वादों को 'भूलभुलैया' करार दिया और कहा कि संविधान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना ही गणतंत्र की असली जीत है।

Mayawati

Mayawati Demand: गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने देशवासियों को बधाई देने के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया। उन्होंने सरकारों के कामकाज को जनहित से दूर बताते हुए कहा कि वर्तमान में जनता को केवल दावों और लुभावने वादों की ‘भूलभुलैया’ में उलझाया जा रहा है। मायावती ने स्पष्ट किया कि संविधान पर गर्व करने का असली अर्थ तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने आत्मचिंतन का आह्वान करते हुए सरकारों से अपनी नीतियों में बदलाव लाने की अपील की।

कांशीराम के लिए भारत रत्न की पुरजोर वकालत

Mayawati ने अपने संदेश में मान्यवर कांशीराम के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के करोड़ों गरीबों, शोषितों और पीड़ितों को आत्म-सम्मान दिलाने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि करोड़ों अनुयायियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए अब बिना किसी देरी के कांशीराम जी को ‘भारत रत्न’ दिया जाना चाहिए। बसपा प्रमुख के अनुसार, यह सम्मान न केवल उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम भी होगा।

सरकारी दावों को बताया छलावा

सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए Mayawati ने कहा कि आज यह आकलन करने का समय है कि क्या वाकई संविधान की मंशा के अनुरूप सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र मजबूत हुआ है? उन्होंने “भूलभुलैया” शब्द का उपयोग करते हुए कहा कि जनता को विज्ञापनों और दावों के जरिए भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक लोगों के वास्तविक जीवन स्तर में सुधार नहीं होता, तब तक समस्याओं से मुक्ति मिलना असंभव है।

“सरकारों को अपनी छलावापूर्ण बातों से बाहर निकलना चाहिए। केवल लुभावने वादों से पेट नहीं भरता, ठोस नीतियों और निष्ठापूर्वक अमल से ही जनकल्याण संभव है।”

संविधान और जनहित की सर्वोच्चता

Mayawati ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर पद्म पुरस्कारों और वीरता पुरस्कारों से सम्मानित होने वाले नागरिकों को बधाई दी, लेकिन साथ ही यह भी याद दिलाया कि गणतंत्र की असली सफलता ‘सर्वसमाज हित’ में ही निहित है। उन्होंने कहा कि बसपा लगातार संविधान की सुरक्षा और उसके सही क्रियान्वयन के लिए संघर्ष करती आ रही है।

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