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किस्त पर खुशियां: नोएडा के ‘रईस’ युवा, जेब में छेद और सिर पर 14 करोड़ का कर्ज!

Noida New Year Youth debt

Noida New Year Youth debt: उत्तर प्रदेश के शो-विंडो कहे जाने वाले नोएडा में ‘ऋणम कृत्वा घृतं पिबेत्’ (कर्ज लेकर घी पीना) की कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। साल 2026 के स्वागत के जोश में गौतमबुद्धनगर के युवाओं ने अपनी जेब से ज्यादा अपनी साख (क्रेडिट) पर भरोसा जताया। आंकड़ों के अनुसार, 25 दिसंबर से 1 जनवरी के बीच जिले के करीब 23,858 युवाओं ने विभिन्न वित्तीय माध्यमों से कर्ज लेकर जश्न मनाया। डिजिटल युग की सुलभता ने युवाओं के लिए लोन लेना इतना आसान बना दिया है कि महज एक सप्ताह के भीतर 14 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पार्टियों, होटलों और क्लबों में उड़ा दी गई। यह उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले में जश्न के लिए लिया गया संभवतः सबसे बड़ा लोन आंकड़ा है।

डिजिटल वॉलेट और BNPL का बढ़ता चलन

तकनीक ने बैंकिंग को उंगलियों पर ला दिया है। इस साल जश्न के लिए युवाओं ने पारंपरिक बैंक लोन के बजाय क्रेडिट कार्ड, नो-कॉस्ट EMI और ‘बाय नाउ पे लेटर’ (BNPL) जैसे विकल्पों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया। फिनटेक प्लेटफॉर्म्स जैसे फोनपे, पेटीएम और अन्य यूपीआई आधारित ऋण प्रदाताओं से छोटे-छोटे लोन लेकर क्लब एंट्री, नाइट पार्टियों के पास और ऑनलाइन केक ऑर्डर किए गए।

पार्टी के जोश में वित्तीय बोझ

Noida और ग्रेटर नोएडा के आलीशान होटलों, बार और पबों में आयोजित नाइट पार्टियों के पास की कीमत हजारों में थी। युवाओं ने न केवल अपनी एंट्री के लिए बल्कि नाइट-आउट और लग्जरी डिनर के लिए भी भारी कर्ज लिया। लीड बैंक मैनेजर राजेश कठेरिया के अनुसार, यह खर्च पूरी तरह ‘इमोशनल स्पेंडिंग’ (भावनात्मक खर्च) की श्रेणी में आता है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में ‘फोमो’ (छूट जाने का डर) इस कदर हावी है कि वे भविष्य की ईएमआई की परवाह किए बिना वर्तमान के जश्न को प्राथमिकता दे रहे हैं।

फरवरी से शुरू होगी ईएमआई की चुनौती

जश्न खत्म हो चुका है और नया साल शुरू हो गया है, लेकिन इसके साथ ही कर्ज चुकाने की चुनौती भी सिर पर है। अधिकांश युवाओं ने 6 महीने से एक साल तक की किस्तों पर यह लोन लिया है। फरवरी 2026 से इन युवाओं के बैंक खातों से ईएमआई कटनी शुरू हो जाएगी। जानकारों का कहना है कि यह प्रवृत्ति व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन (Personal Finance) के लिहाज से खतरनाक है, क्योंकि गैर-जरूरी विलासिता के लिए लिया गया कर्ज अक्सर युवाओं को कर्ज के जाल में फंसा देता है।

अभी कई निजी बैंकों के आंकड़े आने बाकी हैं, जिससे यह 14 करोड़ का आंकड़ा और भी बढ़ने की उम्मीद है। यह रिपोर्ट बदलते भारत की उस तस्वीर को दिखाती है जहां दिखावे की संस्कृति अब बैंकिंग डेटा में भी झलकने लगी है।

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