Panipat Gorakhpur Expressway Extension: उत्तर प्रदेश और हरियाणा के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना आकार ले रही है। पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे को अब कुशीनगर तक बढ़ाने का फैसला किया गया है। इस विस्तार के बाद यह मेगा एक्सप्रेसवे करीब 750 किलोमीटर लंबा हो जाएगा। इसके पूरा होने से पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा।
इस परियोजना से यूपी और हरियाणा के कुल 22 जिलों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। व्यापार, पर्यटन और रोजमर्रा के आवागमन को इससे नई गति मिलेगी।
सर्वे का काम तेज, जल्द शुरू होगा निर्माण
इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सर्वे का काम तेजी से चल रहा है। विशेषज्ञों की टीम ने एलाइमेंट सर्वे पूरा कर लिया है और पीपीगंज इलाके में पत्थर लगाने का काम भी समाप्त हो चुका है। फिलहाल लेवल सर्वे किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, फरवरी तक एक्सप्रेसवे का पूरा डिजाइन तैयार कर लिया जाएगा।
अगर सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो वर्ष 2026 से इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
फोरलेन, चौड़ा और भविष्य के लिए तैयार
यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसे फोरलेन बनाया जाएगा, जिसकी चौड़ाई लगभग 60 से 70 मीटर रखी जाएगी। इसका मकसद यह है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से छह या आठ लेन तक बढ़ाया जा सके।
आधुनिक डिजाइन, बेहतर सुरक्षा और तेज कनेक्टिविटी के चलते यह परियोजना उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में शामिल मानी जा रही है।
कौन से जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे
यह महा-एक्सप्रेसवे कुशीनगर से शुरू होकर गोरखपुर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, बरेली, संभल, अमरोहा, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली से होते हुए हरियाणा के पानीपत तक पहुंचेगा।
सैकड़ों गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
इस परियोजना का असर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। कुशीनगर के 21 गांव और गोरखपुर के 46 गांव इस एक्सप्रेसवे से सीधे लाभान्वित होंगे। अधिकारियों का कहना है कि एलाइनमेंट फाइनल होने के बाद लाभ पाने वाले गांवों की संख्या और बढ़ सकती है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों को कम से कम परेशानी हो।
विकास को मिलेगी नई रफ्तार
शुरुआत में यह एक्सप्रेसवे केवल गोरखपुर से शामली तक प्रस्तावित था। बाद में इसे पानीपत तक बढ़ाया गया और अब कुशीनगर तक विस्तार का निर्णय लिया गया है। इसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जोड़ने की योजना भी है।
इसके बाद यह उत्तर भारत के सबसे बड़े और अहम परिवहन गलियारों में गिना जाएगा।


