Pankaj Chaudhary Attacked Mayawati: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों ब्राह्मण समाज को लेकर मचे घमासान ने 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट तेज कर दी है। हाल ही में बसपा प्रमुख मायावती द्वारा भाजपा पर ब्राह्मणों की उपेक्षा करने के आरोपों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का तीखा पलटवार महज एक बयान नहीं, बल्कि एक गहरी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शून्य की ओर बढ़ रही बसपा पर पंकज चौधरी का इतना हमलावर होना, ब्राह्मण वोट बैंक को बिखरने से बचाने और विपक्ष के ‘नैरेटिव’ को ध्वस्त करने की भाजपा की सोची-समझी कोशिश है।
2027 का रण: ब्राह्मण समाज पर क्यों छिड़ी जंग?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज हमेशा से निर्णायक भूमिका में रहा है। लगभग 11 प्रतिशत की आबादी वाला यह वर्ग न केवल अपनी संख्या, बल्कि सामाजिक प्रभाव के कारण भी चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। हालिया घटनाक्रम में मायावती ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह ब्राह्मणों का उपयोग केवल वोट के लिए करती है और शासन में उन्हें उचित स्थान नहीं मिलता।
मायावती के इस प्रहार पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भाजपा को बसपा से किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा के शासन में ब्राह्मण समाज को न केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं।
पंकज चौधरी की आक्रामकता के पीछे के मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंकज चौधरी की इस नाराजगी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
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नैरेटिव को रोकना: भाजपा नहीं चाहती कि मायावती या कोई भी विपक्षी दल ब्राह्मण समाज के बीच यह संदेश फैलाने में सफल हो कि भाजपा केवल पिछड़ों या दलितों की राजनीति कर रही है।
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‘बी टीम’ के टैग से छुटकारा: मायावती पर अक्सर भाजपा की ‘बी टीम’ होने के आरोप लगते रहे हैं। बसपा पर सीधा हमला कर पंकज चौधरी यह संदेश देना चाहते हैं कि दोनों दलों के बीच कोई अंदरूनी सांठगांठ नहीं है।
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संगठनात्मक एकजुटता: हाल ही में भाजपा के अंदर ही ब्राह्मण विधायकों की कुछ अनौपचारिक बैठकों की खबरें आई थीं। पंकज चौधरी ने इन्हें ‘अनुशासनहीनता’ बताकर साफ कर दिया कि पार्टी जातिगत आधार पर किसी भी तरह की गुटबाजी को बर्दाश्त नहीं करेगी।
बसपा की प्रासंगिकता पर सवाल
एक समय उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज रहने वाली बसपा का ग्राफ पिछले कुछ चुनावों में तेजी से गिरा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में बसपा का खाता भी नहीं खुला। ऐसे में भाजपा का उन पर हमला करना यह दर्शाता है कि भाजपा अभी भी मायावती के ‘सोशल इंजीनियरिंग’ (दलित-ब्राह्मण गठबंधन) के पुराने फार्मूले को हल्के में नहीं लेना चाहती।
Pankaj Chaudhary ने विकास और सुशासन के मुद्दे को आगे रखते हुए कहा कि जनता 2027 में तय करेगी कि किसने धरातल पर काम किया। उनका यह तेवर साफ करता है कि भाजपा 2027 की तैयारी के लिए हर छोटे-बड़े विरोध को समय रहते कुचलने की रणनीति पर काम कर रही है।









