अजेय सोमनाथ, अमर भारत: मोदी ने आक्रांताओं के अंत और सनातन के उत्कर्ष का उद्घोष किया

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ में कहा कि गजनी और औरंगजेब जैसे आक्रांता इतिहास में सिमट गए, जबकि सोमनाथ मंदिर आज भी हिंदुस्तान के सामर्थ्य और सांस्कृतिक विजय की ध्वजा फहरा रहा है। यह स्थल पराजय का नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण का गौरवशाली इतिहास है।

PM Modi

PM Modi Somnath Swabhiman Parv: गुजरात के सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ को संबोधित करते हुए PM Modi ने भारत की अटूट सांस्कृतिक चेतना और संकल्प शक्ति का जयघोष किया। पीएम मोदी ने कहा कि महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक, अनगिनत मजहबी आततायियों ने सोमनाथ की आस्था को मिटाने के कुत्सित प्रयास किए, लेकिन वे सभी आज इतिहास के अंधेरे पन्नों में दफन हो चुके हैं। इसके विपरीत, सोमनाथ मंदिर आज भी पूरे स्वाभिमान के साथ अडिग खड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विनाशकारी ताकतों को यह आभास नहीं था कि सोमनाथ के नाम में ‘सोम’ यानी अमृत समाहित है, जो इसे हर विनाश के बाद पुनर्जीवित होने की शक्ति प्रदान करता है। यह मंदिर भारत के पुनरुत्थान का प्रतीक है।

विनाश पर आस्था की विजय

PM Modi ने अपने संबोधन में सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि एक हजार साल पहले हमारे पूर्वजों ने अपनी आस्था और महादेव के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। उस समय के आक्रांताओं ने सोचा होगा कि उन्होंने भारत की आत्मा को जीत लिया है, लेकिन आज मंदिर के शिखर पर फहराती ध्वजा इस बात का प्रमाण है कि सत्य और भक्ति को कभी पराजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल मंदिर के टूटने और बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह अन्याय के विरुद्ध भारत के प्रतिरोध और संकल्प की गाथा है।

गुलामी की मानसिकता पर प्रहार

PM Modi ने किसी का नाम लिए बिना विपक्ष और पूर्ववर्ती विचारधाराओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी कुछ लोग ‘गुलामी की मानसिकता’ से ग्रसित थे और उन्होंने भारत की महान विरासत व पुण्य स्थलों से पल्ला झाड़ने की कोशिश की। उन्होंने अफसोस जताया कि देश के वास्तविक इतिहास को दबाने और भुलाने के प्रयास किए गए, लेकिन अब नए भारत में विरासत का सम्मान सर्वोपरि है। सोमनाथ जैसे स्थल हमारे सामर्थ्य और परंपरा के जीवंत पर्याय हैं।

सांस्कृतिक वैभव का संगम

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के भव्य आयोजनों की प्रशंसा करते हुए पीएम ने 1,000 ड्रोन के जरिए दिखाई गई 1,000 वर्षों की गाथा और वैदिक विद्यार्थियों की उपस्थिति को मंत्रमुग्ध कर देने वाला बताया। उन्होंने 108 अश्वों के साथ निकाली गई शौर्य यात्रा और भजनों की प्रस्तुति को गौरव और गरिमा का प्रतीक कहा। पीएम मोदी के अनुसार, यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि इसमें वैभव की विरासत, अध्यात्म की अनुभूति और देवाधिदेव महादेव का विशेष आशीर्वाद समाहित है।

आज का सोमनाथ न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यह आधुनिक भारत के उस आत्मविश्वास को भी दर्शाता है जो अपनी जड़ों की ओर लौटते हुए भविष्य का निर्माण कर रहा है।

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