PN Pathak News: कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के हालिया ट्वीट ने उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। पिछले महीने ब्राह्मण विधायकों की एक गुप्त बैठक बुलाकर नेतृत्व की भौहें तानने वाले पाठक ने अब ‘अन्याय के प्रतिकार’ और ‘निर्भीक ब्राह्मण’ की बात कर अपनी मंशा साफ कर दी है। संस्कृत श्लोक के जरिए लोक कल्याण की दुहाई देते हुए उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि ब्राह्मण समाज अब केवल मूकदर्शक नहीं रहेगा, बल्कि अपने हक के लिए मुखर होकर लड़ेगा। पार्टी हाईकमान की चेतावनी के बावजूद पाठक का यह ‘डिजिटल वार’ यूपी भाजपा के भीतर पनप रहे आंतरिक असंतोष और जातीय समीकरणों की नई जद्दोजहद को दर्शाता है।
सत्ता की चाह नहीं, बल्कि जनसेवा का दावा
विधायक PN Pathak ने अपने ट्वीट की शुरुआत एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक से की: “नाऽहं कामये राज्यं, न स्वर्गं, न च पुनर्भवम्…”। इसका अर्थ है कि उन्हें न सत्ता चाहिए, न स्वर्ग और न मोक्ष; वे केवल पीड़ितों की सेवा करना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस श्लोक के जरिए पाठक ने खुद को एक ‘त्यागी’ नेता के रूप में पेश किया है, ताकि उन पर लग रहे ‘बागी’ होने के आरोपों की धार कम की जा सके।
‘अन्याय का प्रतिकार’: किसके खिलाफ इशारा?
ट्वीट का सबसे विवादास्पद और चर्चा का विषय वह हिस्सा है जहाँ PN Pathak ने ‘अन्याय का प्रतिकार’ करने की बात कही है। PN Pathak ने लिखा कि ब्राह्मण का कर्तव्य सत्य बोलना और समाज को दिशा देना है। “निर्भीक होकर खड़ा होना ही ब्राह्मणत्व है” जैसे शब्दों का प्रयोग सीधे तौर पर पार्टी के भीतर ब्राह्मण समाज की कथित उपेक्षा की ओर इशारा माना जा रहा है। सियासी हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या पाठक का इशारा यूपी सरकार की कार्यप्रणाली या संगठन में ब्राह्मणों की घटती धमक की ओर है?
पार्टी हाईकमान की चेतावनी और बढ़ता तनाव
ज्ञात हो कि पिछले महीने करीब एक दर्जन ब्राह्मण विधायकों की बैठक करने पर प्रदेश नेतृत्व ने पाठक को सख्त चेतावनी दी थी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने जातिगत आधार पर ऐसी गतिविधियों को अनुशासनहीनता करार दिया था। इसके बावजूद, पाठक का पीछे न हटना यह बताता है कि यह केवल एक विधायक का व्यक्तिगत ट्वीट नहीं, बल्कि एक बड़े ‘ब्राह्मण प्रेशर ग्रुप’ की आवाज है।
2027 की आहट या आंतरिक कलह?
जैसे-जैसे 2027 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यूपी भाजपा में जातीय वर्चस्व की जंग तेज होती दिख रही है। पीएन पाठक के इस “डिजिटल प्रहार” ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ब्राह्मण राजनीति आने वाले समय में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। अब देखना यह है कि भाजपा नेतृत्व इस ‘अन्याय के प्रतिकार’ वाली हवा को कैसे थामता है।


