Prashant Singh GST: अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर (GST) प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा इन दिनों उत्तर प्रदेश के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक तरफ प्रशांत सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘सम्मान’ और उनके प्रति हुई अभद्र टिप्पणी के विरोध में पद छोड़ने का दावा किया है, वहीं उनके सगे भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने इस कदम को एक “सुनियोजित ड्रामा” करार दिया है। विश्वजीत का आरोप है कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र (Disability Certificate) के जरिए यह प्रतिष्ठित नौकरी हासिल की थी और अब जांच की आंच से बचने के लिए वे इस्तीफे का सहारा ले रहे हैं। इस खुलासे ने पूरे मामले में ‘भक्ति’ बनाम ‘भ्रष्टाचार’ की एक नई बहस छेड़ दी है, जिसने शासन और प्रशासन दोनों को चौंका दिया है।
आस्था का ढाल या कार्रवाई से बचाव?
Prashant Singh GST ने हाल ही में भावुक होकर इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा सीएम योगी पर की गई टिप्पणी से वे आहत हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जिस सरकार का वे ‘नमक’ खाते हैं, उसके मुखिया का अपमान वे सहन नहीं कर सकते। हालांकि, उनके भाई विश्वजीत सिंह का दावा है कि यह पूरी तरह से धोखाधड़ी को छिपाने की कोशिश है।
विश्वजीत के अनुसार, Prashant Singh GST ने खुद को 40 प्रतिशत नेत्रहीन (Vision Impairment) बताते हुए जो प्रमाणपत्र लगाया है, वह चिकित्सकीय दृष्टि से संदिग्ध है। उनका कहना है कि जिस बीमारी का उल्लेख किया गया है, वह 50 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को होना लगभग असंभव है।
2021 से चल रही है जांच की प्रक्रिया
यह मामला नया नहीं है। विश्वजीत सिंह ने 2021 में ही इस फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
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अगस्त 2021: मंडलीय चिकित्सा परिषद ने प्रशांत सिंह को शारीरिक परीक्षण के लिए बुलाया।
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नोटिस की अनदेखी: प्रशांत दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं हुए, जिससे उन पर संदेह और गहरा गया।
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ताजा स्थिति: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) मऊ, डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने पुष्टि की है कि शिकायत के आधार पर जांच जारी है और रिपोर्ट अयोध्या आयुक्त को भेज दी गई है।
जेल और रिकवरी का डर
विश्वजीत का मानना है कि प्रशांत को यह आभास हो गया था कि अब उनके सर्टिफिकेट की वास्तविकता सामने आ जाएगी। सरकारी सेवा के दौरान लिए गए वेतन की रिकवरी और फर्जीवाड़े के आरोप में जेल जाने की सजा से बचने के लिए उन्होंने इसे “नैतिक इस्तीफा” बनाकर पेश किया है। यदि जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है, तो Prashant Singh GST को न केवल अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, बल्कि अब तक मिले सभी आर्थिक लाभों की वसूली और आपराधिक मुकदमे का भी सामना करना होगा। फिलहाल, यह मामला ‘योगी भक्ति’ के पीछे छिपे प्रशासनिक झोल की एक बड़ी कहानी बयां कर रहा है।
