Amitabh Thakur Health Update: उत्तर प्रदेश की देवरिया जिला जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की मंगलवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द और सांस फूलने की शिकायत के बाद उन्हें तत्काल देवरिया के महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) रेफर कर दिया गया। फिलहाल वह आईसीयू में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब मंगलवार को ही स्थानीय कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिससे उन्हें कानूनी मोर्चे पर बड़ा झटका लगा था।
अचानक बिगड़ा स्वास्थ्य: जेल से अस्पताल तक
जेल अधिकारियों के अनुसार, Amitabh Thakur ने मंगलवार रात करीब 11 बजे हृदय संबंधी परेशानी और बेचैनी की शिकायत की। जेल परिसर में मौजूद डॉक्टरों द्वारा प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें तुरंत स्थानीय मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
रेफरल: देवरिया के डॉक्टरों ने हालत की गंभीरता को देखते हुए रात करीब 2 बजे उन्हें गोरखपुर रेफर कर दिया।
वर्तमान स्थिति: बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के अनुसार, उनके ईसीजी (ECG) में कुछ असमानताएं पाई गई हैं। बताया जा रहा है कि वह 2012 से हृदय रोग से पीड़ित हैं और जेल में नियमित दवाओं के सेवन में अनियमितता के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
कानूनी स्थिति: जमानत याचिका खारिज
Amitabh Thakur के लिए कानूनी मुश्किलें भी कम नहीं हो रही हैं।
जमानत नामंजूर: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मंजू कुमारी ने मंगलवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
आगामी कदम: याचिका खारिज होने के बाद उनके वकील अब जिला जज की अदालत में अपील दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।
रिमांड पर सुनवाई: आज (बुधवार) कोर्ट में उनकी पुलिस रिमांड को लेकर भी अहम फैसला आने की उम्मीद है।
मामले की पृष्ठभूमि
Amitabh Thakur को 10 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि:
वर्ष 1999 में देवरिया एसपी रहते हुए उन्होंने पद का दुरुपयोग किया।
कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपनी पत्नी के नाम पर औद्योगिक भूखंड (Industrial Plot) हासिल किया।
हालांकि, पूर्व IPS का दावा है कि उन्हें ‘कफ सिरप घोटाले’ पर सरकार की आलोचना करने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस और सपा, इस मामले को राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं।





