Brij Bhushan Crying Emotional Video: गोंडा स्थित नंदिनी निकेतन में आयोजित आठ दिवसीय ‘राष्ट्रकथा’ महोत्सव के दौरान एक बेहद भावनात्मक दृश्य देखने को मिला। मंच से प्रसिद्ध कथावाचक रितेश्वर महाराज ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की ओर इशारा करते हुए एक ऐसा बयान दिया जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। महाराज ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि यदि लोग बृजभूषण के दबदबे की बात करते हैं, तो वे उनके ‘बाप’ (आध्यात्मिक संरक्षक) के रूप में यहाँ बैठे हैं और उनका भी दबदबा हमेशा कायम रहेगा। इन शब्दों को सुनकर मंच पर मौजूद भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और भावुक हो उठे। महाराज ने इस दौरान सनातन धर्म और राष्ट्र सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए किसी भी प्रकार का शुल्क न लेने की बात भी कही।
ताक़त पद से आती है, लेकिन आँसू दिल से निकलते हैं।
ऊपर से इंसान चाहे जितना सख़्त, मजबूत और निडर दिखे अंदर कहीं न कहीं एक संवेदनशील मन होता है,कथा के दौरान रोते हुए दिखे बृजभूषण शरण सिंह जी pic.twitter.com/ZPcZsoVPL9
— MANISH YADAV लालू (@ManishPDA) January 4, 2026
भावुकता और ‘दबदबे’ का संगम
कथा के दूसरे दिन रितेश्वर महाराज ने पंडाल में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अक्सर लोग गोंडा और उत्तर प्रदेश में Brij Bhushan शरण सिंह के दबदबे की चर्चा करते हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आप समझते हैं कि Brij Bhushan का दबदबा था, है और रहेगा, तो याद रखें कि यहाँ इनका बाप बैठा है। मेरा भी दबदबा पहले भी था, आज भी है और आगे भी रहेगा।”
महाराज के इस बयान ने पंडाल में जोश भर दिया, लेकिन बृजभूषण सिंह को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया। वे मंच पर ही अपने आंसू पोंछते नजर आए और हाथ जोड़कर महाराज का अभिवादन किया।
निस्वार्थ सेवा का संकल्प
अपनी 52 वर्ष की आयु का हवाला देते हुए रितेश्वर महाराज ने स्पष्ट किया कि उन्होंने आज तक कथा करने के लिए किसी से भी धन स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने गर्व से कहा कि भारत भूमि पर वे प्रभु राम, कृष्ण और हनुमान के चरणों में समर्पित होकर सनातन को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने चुनौती दी कि कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि उसने रितेश्वर महाराज को कथा के बदले पैसे दिए हों।
राष्ट्रकथा और सनातन का संदेश
महाराज ने राष्ट्रकथा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्र की एकता और अखंडता को वही व्यक्ति जोड़ सकता है जिसने अपना जीवन और जवानी राम और राष्ट्र के लिए न्योछावर कर दी हो। उन्होंने गोंडा की पावन धरती और सरयू के किनारे इस आयोजन को अपना सौभाग्य बताया।
इस आयोजन के माध्यम से जहाँ एक ओर धार्मिक चेतना जगाने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय राजनीति और व्यक्तिगत संबंधों की प्रगाढ़ता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
