Sambhal News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में उस समय हड़कंप मच गया जब चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर का अचानक सुल्तानपुर तबादला कर दिया गया। यह स्थानांतरण ऐसे समय में हुआ है जब महज एक सप्ताह पहले उन्होंने Sambhal हिंसा मामले में तत्कालीन सीओ और वर्तमान एएसपी अनुज चौधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का कड़ा आदेश दिया था। इस फैसले के बाद संभल जिला न्यायालय के अधिवक्ताओं में भारी रोष है। बुधवार को वकीलों ने अदालती कामकाज ठप कर जिला न्यायालय परिसर में जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि पारदर्शी और साहसी निर्णय लेने वाले अधिकारी का इस तरह तबादला करना न्याय व्यवस्था के लिए गलत संकेत है।
तबादले पर क्यों भड़के वकील?
बुधवार सुबह जैसे ही सीजेएम विभांशु सुधीर के स्थानांतरण की खबर आधिकारिक हुई, Sambhal के वकील लामबंद हो गए। अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर में “तानाशाही नहीं चलेगी” और “सीजेएम साहब को वापस लाओ” जैसे नारे लगाए।
वकीलों का तर्क है कि:
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पारदर्शिता और सक्रियता: विभांशु सुधीर के कार्यकाल में न्यायिक प्रक्रिया में गति आई थी और उनके निर्णय न्यायसंगत एवं सराहनीय थे।
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दबाव की राजनीति: अधिवक्ताओं का मत है कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त आदेश देने के तुरंत बाद तबादला होना संदेहास्पद है।
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कार्यकाल की अवधि: संभल में उनका कार्यकाल मात्र तीन माह का रहा, जो कि सामान्य कार्यकाल से काफी कम है।
क्या था वह विवादित आदेश?
नवंबर 2024 में Sambhal की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भारी हिंसा हुई थी। इस दौरान खग्गू सराय निवासी एक युवक (आलम) को गोली लगी थी। युवक के पिता यामीन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेएम विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी को एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि “गोली चलाना आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं हो सकता” और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
नए नियुक्त अधिकारी और प्रशासनिक फेरबदल
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जारी सूची के अनुसार, विभांशु सुधीर को अब सुल्तानपुर में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर भेजा गया है। उनके स्थान पर आदित्य सिंह को संभल का नया सीजेएम नियुक्त किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि आदित्य सिंह वही जज हैं जिन्होंने शाही जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था। वकीलों ने इस नियुक्ति पर भी हैरानी जताई है।
Sambhal प्रशासनिक दृष्टिकोण से इसे एक सामान्य फेरबदल बताया जा रहा है जिसमें 14 अन्य न्यायिक अधिकारियों के भी तबादले हुए हैं, लेकिन संभल हिंसा मामले की संवेदनशीलता ने इसे एक बड़े विवाद का रूप दे दिया है।









