Sambhal Violence Case:उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हुई हिंसा से जुड़ा मामला अब एक नए और संवेदनशील दौर में पहुंच गया है। चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने हिंसा के दौरान हुई फायरिंग को गंभीर मानते हुए बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत कुल 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, इस आदेश के बाद पुलिस और अदालत आमने-सामने नजर आ रही हैं। संभल के मौजूदा एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने साफ कहा है कि फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी और इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की जाएगी।
पिता की याचिका से शुरू हुआ मामला
यह पूरा मामला हिंसा में घायल युवक आलम के पिता यामीन की याचिका से जुड़ा है। यामीन ने अदालत में कहा कि उनका बेटा आलम सामान बेचने के लिए घर से निकला था। उसी दौरान हिंसा भड़क गई और पुलिस फायरिंग में उसे गोली लग गई।
याचिका में यामीन ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, उस समय के संभल सदर कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और 10 से 12 अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बताते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और गंभीरता को देखते हुए पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
कोर्ट के आदेश पर एसपी की रिप्लाई
अदालत के निर्देशों के बावजूद संभल एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि पुलिस इस आदेश को सीधे लागू नहीं करेगी। उनका कहना है कि संभल हिंसा मामले में पहले ही न्यायिक जांच पूरी हो चुकी है। एसपी के अनुसार, जिन पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है, उनकी भूमिका की जांच पहले ही की जा चुकी है। पुलिस प्रशासन का मानना है कि ऐसे में सीधे मुकदमा दर्ज करने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाते हुए उच्च अदालत में अपील करना ज्यादा उचित होगा।
कहां तैनात हैं आरोपी अधिकारी
जिन पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर का आदेश आया है, वे फिलहाल अलग-अलग जगहों पर तैनात हैं। तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी को पदोन्नति मिल चुकी है और वे अब एएसपी हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती फिरोजाबाद जिले में है। वहीं, उस समय संभल सदर कोतवाली के इंस्पेक्टर रहे अनुज तोमर अभी भी संभल जिले में ही चंदौसी कोतवाली में तैनात हैं। कोर्ट के आदेश के बाद इन अधिकारियों की भूमिका को लेकर पुलिस विभाग के अंदर भी चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस विभाग में बढ़ी हलचल
कोर्ट के सख्त रुख और पुलिस के इनकार के बाद पूरा मामला और संवेदनशील हो गया है। एक तरफ पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन अपने अधिकारियों का पक्ष रखते हुए पहले से हुई न्यायिक जांच का हवाला दे रहा है।
अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं।कि जब पुलिस इस आदेश के खिलाफ अपील करेगी, तो उच्च अदालत क्या फैसला सुनाती है। यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।




