Sambhal violence case ASP Anuj Chaudhary: संभल की शाही जामा मस्जिद सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा के मामले में कोर्ट ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (CO) अनुज चौधरी और उनके साथ मौजूद 15-20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का बड़ा निर्देश दिया है। अनुज चौधरी वर्तमान में फिरोजाबाद के एएसपी (ग्रामीण) के पद पर कार्यरत हैं। इस आदेश के बाद पुलिस प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। संभल के एसएसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अपने विभाग के अधिकारियों का बचाव करते हुए स्पष्ट किया है कि वे निचली अदालत के इस निर्णय के विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील करेंगे और फिलहाल कोई केस दर्ज नहीं किया जाएगा। एसएसपी का तर्क है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों का मनोबल बनाए रखना आवश्यक है और वे कानूनी प्रक्रिया के तहत ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
क्या है पूरा मामला?
24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद में अदालती आदेश पर सर्वे का काम चल रहा था। इस दौरान इलाके में भारी तनाव फैल गया और हजारों की भीड़ इकट्ठा हो गई। स्थिति अनियंत्रित होने पर पथराव और फायरिंग शुरू हो गई। इसी हिंसा के बीच मोहल्ला खगूसराय के रहने वाले एक नाबालिग युवक, आलम को गोली लग गई। इलाज के दौरान अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
आलम के पिता यामीन का आरोप है कि उनका बेटा मस्जिद के पास बिस्किट बेचने गया था और पुलिस की सीधी गोलीबारी का शिकार हो गया। पुलिस प्रशासन की ओर से कार्रवाई न होने पर यामीन ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
CJM कोर्ट का आदेश और Sambhal पुलिस पर आरोप
याचिका पर सुनवाई करते हुए CJM कोर्ट ने माना कि इस मामले में प्राथमिक जांच और FIR अनिवार्य है। कोर्ट ने जिन पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है उनमें मुख्य नाम हैं:
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अनुज चौधरी: तत्कालीन CO Sambhal (वर्तमान ASP फिरोजाबाद)।
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अनुज तोमर: पूर्व सदर कोतवाल।
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अन्य 10 पुलिसकर्मी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय प्रक्रिया के तहत आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि हिंसा के दौरान हुई मौतों की जवाबदेही तय की जा सके।
अनुज चौधरी: विवादों और उपलब्धियों का सफर
अनुज चौधरी यूपी पुलिस का एक ऐसा चेहरा हैं जो अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। उनका करियर और व्यक्तित्व कई पहलुओं में बंटा हुआ है:
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खिलाड़ी से पुलिस अफसर: मुजफ्फरनगर के रहने वाले अनुज चौधरी ने 2004 के एथेंस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। वे एक प्रतिष्ठित पहलवान रहे हैं और उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। 2012 में वे स्पोर्ट्स कोटे से पुलिस सेवा में आए थे।
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टर्निंग पॉइंट रहा संभल: संभल में उनकी तैनाती 2023 में हुई थी। यहीं रहते हुए वे विवादित बयानों और अपनी कार्यशैली के कारण चर्चा में आए। 2024 की हिंसा के समय वे मौके पर मौजूद थे, और इसके कुछ समय बाद ही उन्हें ASP के पद पर पदोन्नत किया गया।
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विवादित बयान: अनुज चौधरी अपने “होली साल में एक बार, जुम्मा 52 बार” वाले बयान को लेकर काफी चर्चा में रहे, जिसकी विपक्ष ने तीखी आलोचना की थी।
सोशल मीडिया और ‘पहलवान’ की छवि
अनुज चौधरी की इंस्टाग्राम पर लाखों की फैन फॉलोइंग है। वे अक्सर अपनी वर्कआउट रील्स और मंदिरों में पूजा-अर्चना के वीडियो शेयर करते हैं। संभल हिंसा के बाद एक बंद पड़े मंदिर को खोलकर पूजा करने वाली उनकी तस्वीरें काफी वायरल हुई थीं। हालांकि, विपक्षी दल और पूर्व IPS अधिकारी उन पर सांप्रदायिक रंग देने और वर्दी के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं।









