Sawan Kanwar Yatra: सावन के पहले दिन उत्तर प्रदेश पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। सुबह होते ही शिवालयों में घंटियों की गूंज सुनाई देने लगी और भगवान शिव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। कंधों पर कांवड़ और होठों पर ‘बम-बम भोले’ का जयघोष लिए हजारों श्रद्धालु अपनी धार्मिक यात्रा पर निकल पड़े। उत्तराखंड से आने वाले कांवड़ियों का राज्य की सीमा पर स्वागत किया गया, जबकि काशी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी भक्तों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली।
आस्था के साथ बेहतर व्यवस्थाओं का भरोसा
कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे मार्ग पर सुरक्षा, सफाई, चिकित्सा और पेयजल की व्यापक व्यवस्था की गई है। जगह-जगह पुलिस बल तैनात है, जबकि सेवा शिविरों में भोजन, विश्राम और प्राथमिक उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हरिद्वार से 131 लीटर गंगाजल लेकर बागपत जा रहे श्रद्धालु अभिषेक त्यागी ने यात्रा मार्ग पर उपलब्ध व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक महसूस हो रही है।
नन्हे श्रद्धालुओं ने बढ़ाया उत्साह
यात्रा के दौरान कई प्रेरणादायक दृश्य भी सामने आए। हरियाणा के कैथल का 11 वर्षीय बालक हरिद्वार से 31 लीटर गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुआ। सहारनपुर के गागलहेड़ी क्षेत्र में स्थानीय पुलिसकर्मियों ने कुछ दूरी तक उसके साथ चलकर उसका उत्साह बढ़ाया। यह दृश्य श्रद्धा और सहयोग की भावना का प्रतीक बन गया।
सेवा शिविर बने यात्रा की ताकत
मेरठ सहित कांवड़ मार्ग पर अनेक सेवा शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां स्वयंसेवक दिन-रात श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हैं। भोजन, पानी, विश्राम और चिकित्सा जैसी सुविधाएं निःस्वार्थ भाव से उपलब्ध कराई जा रही हैं। उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश सीमा पर बनाए गए स्वागत द्वार भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
पंचक काल के कारण फिलहाल कांवड़ियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन श्रद्धा और उत्साह में कोई कमी नहीं है। ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ आगे बढ़ते श्रद्धालु यह संदेश दे रहे हैं कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन, सेवा और समर्पण का जीवंत प्रतीक है।
