School Chalo Abhiyan 2026: उत्तर प्रदेश में नए शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ “स्कूल चलो अभियान” का शुभारंभ होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस अभियान की शुरुआत वाराणसी से करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह 9:30 बजे कंपोजिट विद्यालय शिवपुर में आयोजित होगा। खास बात यह है कि इस पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी दिखाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें।
दो चरणों में चलेगा अभियान
इस अभियान को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला चरण 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 1 जुलाई से 15 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा। इन दोनों चरणों में अलग-अलग स्तर पर कई कार्यक्रम होंगे। जिला, ब्लॉक और स्कूल स्तर पर बच्चों के नामांकन को बढ़ाने पर खास ध्यान दिया जाएगा। साथ ही बच्चों को किताबें और स्कूल बैग भी बांटे जाएंगे।
हर जिले में होंगे बड़े कार्यक्रम
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के साथ-साथ राज्य के सभी जिलों में भी बड़े आयोजन किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को दी गई है। इनमें जनप्रतिनिधि, शिक्षक, छात्र, अभिभावक और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल होंगे। सरकार का मकसद है कि इस अभियान को एक जन आंदोलन का रूप दिया जाए, ताकि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से छूट न जाए।
बच्चों को मिलेगा पूरा सहयोग
स्कूल शिक्षा की महानिदेशक मोनिका रानी ने बताया कि इस अभियान के दौरान बच्चों का नामांकन करने के साथ-साथ उन्हें नई किताबें भी दी जाएंगी। स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी और जनप्रतिनिधि बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में समझाएंगे। शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि हर बच्चा पढ़े और आगे बढ़े।
जागरूकता पर रहेगा खास जोर
अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। रैलियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य जागरूकता गतिविधियां बड़े स्तर पर कराई जाएंगी। नए छात्रों का नामांकन बढ़ाने और उन्हें स्कूल से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों को दी जाने वाली किताबों की पैकिंग और वितरण व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जाएगा।
प्रचार-प्रसार पर भी ध्यान
इस अभियान की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे, इसके लिए मीडिया और सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा। सरकार चाहती है कि हर परिवार तक शिक्षा का संदेश पहुंचे और लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित हों। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि सभी निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि अभियान पूरी तरह सफल हो सके।

