Voter List Revision: देश के 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया में करीब 51 करोड़ मतदाता शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। बताया जा रहा है कि प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को जारी की जाएगी।
फॉर्म 6, 7 और 8 का इस्तेमाल
रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट 1950 और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स नियमों के तहत मतदाता सूची में बदलाव किए जा रहे हैं। नया नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6, नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 और नाम या पता ठीक कराने के लिए फॉर्म-8 भरा जा रहा है। इन सभी फॉर्मों के जरिए मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है।
फॉर्म-7 को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा फॉर्म-7 की हो रही है। चुनाव आयोग के अनुसार फॉर्म-7 किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने के लिए इस्तेमाल होता है। यह आवेदन मृत्यु, स्थान परिवर्तन या किसी अन्य कारण से नाम हटाने के लिए दिया जाता है। आयोग ने साफ कहा है कि गलत जानकारी देने पर एक साल तक की जेल और जुर्माना भी हो सकता है।
विपक्ष के गंभीर आरोप
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-7 के जरिए पीडीए और मुस्लिम मतदाताओं के वोट योजनाबद्ध तरीके से कटवाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि कई जगहों पर प्रिंटेड फॉर्म जमा कर वोट हटाने की साजिश हो रही है। उन्होंने मांग की है कि अब तक जमा फॉर्म-7 की जांच कराई जाए और संदिग्ध फॉर्म निरस्त किए जाएं।
बीजेपी ने आरोप नकारे
भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की एक तय प्रक्रिया है और सिर्फ शिकायत से किसी का नाम नहीं हटता। बीजेपी नेताओं के अनुसार विपक्ष लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
कई जिलों से आई शिकायतें
प्रदेश के बदायूं, सिद्धार्थनगर और गोंडा समेत कई जिलों से फॉर्म-7 को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि बिना जानकारी के उनके नाम हटाने के आवेदन दिए गए हैं। वहीं कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा कई नाम हटाने के आवेदन दिए जाने की बात भी सामने आई है।
चुनाव आयोग की सफाई
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना नोटिस और सुनवाई के नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि हर फॉर्म-7 की जांच होगी और सही प्रक्रिया के बाद ही कार्रवाई होगी। यदि किसी के हस्ताक्षर फर्जी पाए जाते हैं तो एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।
आंकड़ों से क्या पता चलता है
चुनाव आयोग के अनुसार 5 फरवरी तक नाम जोड़ने के लिए करीब 37 लाख से ज्यादा फॉर्म जमा हुए हैं, जबकि नाम हटाने के लिए करीब 82 हजार फॉर्म-7 जमा किए गए हैं। आयोग का कहना है कि अभी किसी का नाम अंतिम रूप से नहीं हटाया गया है और सभी मामलों की जांच जारी है।
लोगों को मिल रहे नोटिस
कई मतदाताओं को दस्तावेजों की जांच के लिए नोटिस भी भेजे जा रहे हैं। आयोग के अनुसार जिन मतदाताओं की जानकारी में गड़बड़ी है या पुराने रिकॉर्ड नहीं मिले हैं, उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। सुनवाई के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
