Varanasi News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास कार्य को लेकर छिड़ा विवाद अब राजनीतिक संग्राम में बदल गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर रविवार को मणिकर्णिका घाट का निरीक्षण करने जा रहे सपा प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने शहर के विभिन्न स्थानों पर रोक दिया। चंदौली से सांसद वीरेंद्र सिंह को जब उनके अर्दली बाजार स्थित आवास से बाहर निकलते ही पुलिस ने रोका, तो वे आक्रोशित होकर वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कई प्रमुख नेताओं को नजरबंद कर दिया और दर्जनों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। सपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार ऐतिहासिक मूर्तियों को तोड़े जाने का सच छिपाने की कोशिश कर रही है।
#WATCH | Varanasi: On Manikarnika Ghat row, Samajwadi Party MP Virendra Singh says, "… We are going for inspection of Manikarnika Ghat. The government has created a situation of confusion. They are trying to prove the public wrong; they are saying that the video was created by… pic.twitter.com/NYhRTdVEPI
— ANI (@ANI) January 25, 2026
सच्चाई जानने से रोकने का आरोप
सांसद वीरेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में Varanasi जिला प्रशासन की कार्रवाई पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल केवल यह देखने जा रहा था कि क्या वास्तव में मणिकर्णिका घाट पर राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति और प्राचीन मंदिरों को क्षति पहुंचाई गई है। सिंह ने आरोप लगाया, “प्रशासन पहले हमें अनुमति देने की बात कर रहा था, लेकिन अचानक पुलिस बल तैनात कर हमें घर में ही कैद कर दिया गया। अगर सरकार कुछ छिपा नहीं रही है, तो हमें घाट पर जाने से क्यों रोका जा रहा है? यह लोकतंत्र की हत्या है।”
भारी पुलिस बल तैनात, कई नेता नजरबंद
रविवार सुबह से ही Varanasi के विभिन्न इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस प्रशासन ने लहुराबीर, अर्दली बाजार और नक्कास जैसे संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग कर दी थी। सपा नेता लालू यादव को उनके आवास पर नजरबंद किया गया, जबकि बलिया सांसद सनातन पांडेय को गाजीपुर के टोल प्लाजा पर ही रोक लिया गया। वाराणसी की अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नीतू कात्यायन ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले अनुमति दी गई थी, लेकिन कुछ संगठनों द्वारा प्रदर्शन के आह्वान के बाद सुरक्षा कारणों से इसे रद्द करना पड़ा।
क्या है मणिकर्णिका घाट विवाद?
विवाद की जड़ मणिकर्णिका घाट के सुंदरीकरण और पुनर्विकास प्रोजेक्ट में है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर प्राचीन मूर्तियों और ढांचों को मलबे में दिखाया गया है। हालांकि, प्रशासन ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें ‘AI जनित’ या भ्रामक बताया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी स्पष्ट किया है कि कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया है, बल्कि धरोहर को सुरक्षित रखते हुए विकास कार्य किया जा रहा है। इसके बावजूद, विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटे हैं।
वर्तमान में Varanasi जिलाधिकारी और Varanasi सपा नेताओं के बीच बातचीत का दौर जारी है, लेकिन सांसद वीरेंद्र सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उन्हें घाट जाने की अनुमति नहीं मिलती, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
