Spiritual Tourism Boom:नव्य-भव्य तीर्थस्थलों से बदली तस्वीर,बेहतर सुविधाओं और बढ़ती आस्था से तीर्थाटन बना लोगों की पहली पसंद

नव्य-भव्य धार्मिक स्थलों, बेहतर सड़कों और सुविधाओं से उत्तर प्रदेश में तीर्थ पर्यटन तेजी से बढ़ा है। कोरोना के बाद बढ़ी आस्था से अयोध्या, काशी और मथुरा में रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुंच रहे

Spiritual Tourism Boom:काशी, अयोध्या, विंध्यधाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों का बदला हुआ स्वरूप अब देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। प्रयागराज में हुए भव्य महाकुंभ के बाद इन धार्मिक स्थलों की पहचान और मजबूत हुई है। मथुरा-वृंदावन तक बेहतर सड़कें, साफ-सुथरी व्यवस्था और पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार ने तीर्थाटन को और आसान बना दिया है। नतीजा यह है कि अब पर्यटक सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति के साथ तीर्थ यात्रा के लिए उमड़ रहे हैं।

कोरोना के बाद बढ़ा अध्यात्म की ओर झुकाव

कोरोना काल के बाद लोगों के जीवन में अध्यात्म का महत्व और बढ़ा है। इसी दौर में अयोध्या, काशी और विंध्यधाम जैसे धार्मिक केंद्र नए और भव्य रूप में सामने आए। इसका सीधा असर श्रद्धालुओं की संख्या पर दिखा। पहले अयोध्या में मंदिर निर्माण से पहले साल भर में करीब 25 से 30 लाख लोग आते थे, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

आंकड़े बताते हैं बढ़ती आस्था

वर्ष 2025 में अयोध्या में करीब 29 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। काशी में साढ़े 16 करोड़ और मथुरा-वृंदावन में लगभग 10 करोड़ लोगों ने दर्शन किए। नववर्ष की पूर्व संध्या और नए साल के पहले दिन उमड़ी भारी भीड़ ने यह साफ कर दिया कि लोगों में अपने आराध्य के प्रति आस्था और तीर्थाटन की लगन लगातार बढ़ रही है।
मथुरा-वृंदावन बना पसंदीदा ठिकाना

मथुरा-वृंदावन होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, कोरोना के बाद हर साल श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। यहां रहना और खाना अन्य पर्यटन स्थलों की तुलना में सस्ता है। पहले श्रद्धालु केवल वृंदावन दर्शन तक सीमित रहते थे, लेकिन अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि, गोकुल, गोवर्धन और बरसाना भी उनकी यात्रा का हिस्सा बन चुके हैं।

स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार

ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत दिनेश गोस्वामी बताते हैं कि ब्रज क्षेत्र में भीड़ बढ़ने की बड़ी वजह लोगों का बढ़ता धार्मिक रुझान है। वहीं, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और बीएचयू से जुड़े प्रोफेसर ब्रजभूषण ओझा का कहना है कि काशी में एक तीर्थ यात्री के आने से कम से कम सात परिवारों की रोजी-रोटी चलती है। इसमें रिक्शावाले, फूल विक्रेता, होटल संचालक और बुनकर जैसे लोग शामिल हैं।

कम बजट में भी संभव तीर्थ यात्रा

चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थल कम बजट में यात्रा करने वालों के लिए भी आकर्षण बने हुए हैं। यहां एक सामान्य परिवार पांच से दस हजार रुपये में आराम से यात्रा पूरी कर सकता है। महाकुंभ के भव्य आयोजन के बाद भी उत्तर प्रदेश की पवित्र भूमि के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा है।

अयोध्या-काशी में रिकॉर्ड श्रद्धालु

अयोध्या में 2024 में जहां लगभग 22 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे, वहीं अब इनकी संख्या में करीब सात करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वाराणसी में 2024 में 11 करोड़ पर्यटक आए थे, जिनमें करीब 31 हजार विदेशी थे। इस साल नवंबर तक 16.60 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आ चुके हैं। मथुरा में भी दिसंबर 2025 तक श्रद्धालुओं की संख्या दस करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।

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