Sultanpur Janmashtami Dispute:सुल्तानपुर के दुबेपुर विकासखंड स्थित पलहीपुर गांव में जन्माष्टमी आयोजन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रशासन पर जन्माष्टमी का कार्यक्रम रोकने, मूर्ति हटाने और प्रसाद फेंके जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद जिला प्रशासन ने इन दावों को निराधार और भ्रामक बताया है। जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह के निर्देश पर एसडीएम सदर गरिमा सोनाकिया ने पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए प्रशासन का पक्ष सामने रखा।
बिना अनुमति तैयारी
एसडीएम के अनुसार, 3 सितंबर की रात पलहीपुर गांव में ग्राम समाज की बंजर भूमि पर धार्मिक आयोजन की तैयारी की जा रही थी। प्रशासन के मुताबिक, गाटा संख्या 1679 पर बिना अनुमति चबूतरा बनाकर टेंट आदि लगाए गए थे। इसकी जानकारी मिलने के बाद राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने वहां मौजूद लोगों को जमीन और निर्माण की कानूनी स्थिति के बारे में जानकारी दी। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य जन्माष्टमी मनाने पर रोक लगाना नहीं था।
आयोजकों ने हटाई मूर्ति
प्रशासन के मुताबिक, टीम के मौके पर पहुंचने के बाद आयोजकों ने खुद छोटी मूर्ति को सम्मानपूर्वक वहां से हटा लिया। इसके साथ ही चबूतरा भी आयोजकों ने स्वयं तोड़ दिया। प्रशासन का दावा है कि अधिकारियों की टीम के मौके से चले जाने के बाद गोरेलाल यादव, रामीश यादव और उनके अन्य समर्थकों ने सड़क पर प्रसाद फेंका और नारेबाजी की। अधिकारियों ने कहा है कि इस पूरे घटनाक्रम से संबंधित वीडियो भी उनके पास उपलब्ध है।
मुकदमा हुआ दर्ज
एसडीएम के अनुसार, मामले में शांति व्यवस्था प्रभावित करने के प्रयास को लेकर थाना कोतवाली नगर में मुकदमा संख्या 0467/2026 दर्ज किया गया है। प्रशासन ने साफ किया कि यह कार्रवाई धार्मिक आयोजन के खिलाफ नहीं थी। अधिकारियों के मुताबिक, ग्राम समाज की बंजर भूमि पर बिना अनुमति निर्माण और आयोजन की तैयारी को लेकर संबंधित लोगों को कानूनी स्थिति समझाई गई थी। प्रशासन ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी कहा कि मूर्ति या प्रसाद उसकी टीम ने नहीं फेंका।
प्रशासन की अपील
विवाद के राजनीतिक मुद्दा बनने के बाद जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि संवेदनशील मामलों में किसी भी जानकारी को बिना सत्यापन सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर साझा न करें। प्रशासन का कहना है कि अपुष्ट दावों और सूचनाओं से क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। फिलहाल मामले में राजनीतिक आरोपों और प्रशासन के स्पष्टीकरण के बीच दोनों पक्षों के दावों को लेकर चर्चा जारी है।
