Umar Convoy: अतीक के बेटे उमर के काफिले की 25-30 कारों पर टोल न देने का आरोप, बैरियर टूटने ,धमकाने पर FIR

प्रयागराज के नवाबगंज टोल प्लाजा पर मोहम्मद उमर के काफिले से जुड़ी निजी कारों को लेकर विवाद सामने आया है। प्रबंधन ने टोल न देने, बैरियर तोड़ने और कर्मचारियों को धमकाने का आरोप लगाया है।

Umar Convoy Toll Plaza News

Toll Plaza controversy: प्रयागराज के नवाबगंज टोल प्लाजा पर 8 अगस्त को मोहम्मद उमर के काफिले से जुड़ा मामला सामने आया है। टोल प्लाजा प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि उमर को लखनऊ जेल से वापस ले जाते समय पुलिस एस्कॉर्ट के पीछे करीब 25 से 30 निजी वाहन टोल प्लाजा पहुंचे। प्रबंधन के मुताबिक, सरकारी पुलिस वाहनों को नियमित प्रक्रिया के तहत गुजरने दिया गया, लेकिन पीछे आ रही निजी गाड़ियों को टोल भुगतान के लिए रोकने की कोशिश की गई।

बिना शुल्क निकलने का आरोप

शिकायत के अनुसार, निजी वाहनों में से कई ने टोल देने के बजाय तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान टोल बूथ पर लगा बूम बैरियर क्षतिग्रस्त हो गया। प्रबंधन का आरोप है कि वाहनों में सवार लोगों ने टोल शुल्क का भुगतान नहीं किया और कर्मचारियों के साथ विवाद की स्थिति पैदा हो गई। घटना के बाद टोल प्रबंधन की ओर से नवाबगंज थाने में शिकायत दी गई, जिसके आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कर्मचारियों ने लगाए गंभीर आरोप

टोल प्लाजा प्रबंधन ने अपनी शिकायत में कर्मचारियों के साथ कथित गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है। इसके अलावा कर्मचारियों को धमकी देने और कुछ वाहनों से उन्हें कुचलने की कोशिश किए जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायत में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही यह साफ होगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।

फुटेज से खुलेगा राज

इस मामले की जांच में टोल प्लाजा पर लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग अहम भूमिका निभा सकती है। फुटेज के जरिए पुलिस यह पता लगा सकती है कि घटना के समय कितने वाहन वहां पहुंचे और किस तरह उन्होंने टोल लेन को पार किया। अगर कैमरों में वाहनों के नंबर स्पष्ट दिखाई देते हैं तो उनका एफआईआर में दर्ज नंबरों से मिलान किया जा सकता है। इसके साथ ही मौके पर मौजूद कर्मचारियों के बयान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।

वाहन नंबरों से जांच आगे

पुलिस के सामने सबसे पहले काफिले के साथ टोल प्लाजा से गुजरने वाले निजी वाहनों की पहचान करने की चुनौती है। एफआईआर में दर्ज वाहन नंबरों के आधार पर पुलिस उनके रजिस्ट्रेशन और मालिकों की जानकारी जुटा सकती है। इसके बाद यह पता लगाया जाएगा कि घटना के समय इन वाहनों को कौन चला रहा था और क्या वे सभी एक ही काफिले का हिस्सा थे। बैरियर किस वाहन से क्षतिग्रस्त हुआ, टोल भुगतान हुआ या नहीं और कर्मचारियों के साथ कथित अभद्रता व धमकी के आरोपों में कितनी सच्चाई है, इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल नवाबगंज पुलिस CCTV फुटेज, कर्मचारियों के बयान और वाहन नंबरों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

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