Monsoon Session 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू होकर 6 अगस्त तक चलने की संभावना है। सत्र के पहले दिन आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक आलमबदी के निधन पर शोक प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा। श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी जाएगी। इसके बाद अगले दिनों में सरकार वित्तीय और विधायी कार्यों को आगे बढ़ाएगी। इस बार का सत्र आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है।
अनुपूरक बजट पर सबकी नजर
4 अगस्त को दोपहर 12:20 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक अनुदानों की मांगें विधानसभा में पेश की जाएंगी। माना जा रहा है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार इस अनुपूरक बजट में कुछ लोकलुभावन घोषणाएं कर सकती है। इसके साथ ही नई विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए भी अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले सरकार 2026-27 का 9.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मूल बजट पारित कर चुकी है।
अध्यादेशों की जगह आएंगे नए विधेयक
सरकार पिछले विधानसभा सत्र के बाद अब तक नौ अध्यादेश जारी कर चुकी है। इनमें राजस्व संहिता संशोधन, निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े संशोधन, लोक सेवा अधिकरण संशोधन, वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय और दंड विधि से जुड़े अध्यादेश शामिल हैं। अब सरकार इन अध्यादेशों के स्थान पर प्रतिस्थानी विधेयक सदन में पेश कर सकती है। इसके अलावा कुछ नए विधेयकों को भी इस मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने की संभावना है।
विभागीय रिपोर्टें भी होंगी पेश
5 अगस्त को सदन में विधायी कार्यों के साथ अन्य सरकारी कामकाज भी निपटाए जाएंगे। वहीं 6 अगस्त को अनुपूरक बजट पर चर्चा के बाद उसे पारित कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस दौरान विभिन्न विभागों से संबंधित भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्टें भी सदन के पटल पर रखी जाएंगी। इन रिपोर्टों के जरिए सरकारी योजनाओं और विभागों के वित्तीय कार्यों की समीक्षा सामने आएगी।
संभल हिंसा रिपोर्ट बनेगी चर्चा का विषय
इस मानसून सत्र में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी सदन में पेश की जाएगी। इस रिपोर्ट पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। ऐसे में अनुपूरक बजट, नए विधेयकों और न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के कारण यह मानसून सत्र राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
