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UP उपचुनाव: भाजपा ने सिसमऊ से सुरेश अवस्थी को मैदान में उतारा, सपा के सामने चुनौती

UP by-election: उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनावों के लिए भाजपा ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है। कानपुर की चर्चित सिसमऊ सीट (UP by-election) से सुरेश अवस्थी को उम्मीदवार घोषित किया गया है, जिससे चुनावी सरगर्मी और तेज हो गई है। सिसमऊ की सीट पर समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी की विधायकी खत्म होने के बाद भाजपा ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार चुना है। सुरेश अवस्थी को टिकट देकर भाजपा ने यह साफ कर दिया है कि वह सिसमऊ जैसे मजबूत गढ़ में भी सेंध लगाने की तैयारी में है।

भाजपा ने सुरेश अवस्थी को चुना उम्मीदवार

भाजपा ने गुरुवार को सिसमऊ विधानसभा सीट से सुरेश अवस्थी को उम्मीदवार बनाया है, जो कानपुर में एक जाने-माने नेता हैं। इरफान सोलंकी की गिरफ्तारी और सजा के बाद यह सीट खाली हुई थी, और भाजपा के पास इसे जीतने का अच्छा मौका है। सिसमऊ सीट पर समाजवादी पार्टी का मजबूत प्रभाव रहा है, लेकिन इस बार भाजपा ने अपनी रणनीति को धार दी है, जिससे मुकाबला बेहद रोचक हो गया है।

UP by-election

सात सीटों पर घोषित हुए भाजपा के उम्मीदवार

सिसमऊ के (UP by-election) साथ-साथ भाजपा ने अन्य सात सीटों पर भी अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं। इनमें करहल से अनुजेश यादव, कुंदरकी से रामवीर सिंह ठाकुर, गाजियाबाद से संजीव शर्मा, खैर (अजा) से सुरेंद्र दिलेर, फूलपुर से दीपक पटेल, कटेहरी से धर्मराज निषाद और मझवां से सुचिस्मिता मौर्या शामिल हैं। लेकिन सिसमऊ पर सुरेश अवस्थी की दावेदारी ने कानपुर में राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है।

UP Byelection: सीसामऊ विधानसभा सीट पर भाजपा ने उतारा उम्मीदवार

सपा के लिए मुश्किल चुनौती

सिसमऊ (UP by-election) सीट पर सपा का लंबे समय से दबदबा रहा है, लेकिन इरफान सोलंकी के जेल जाने के बाद भाजपा इसे अपने पक्ष में करने की कोशिश में है। सुरेश अवस्थी का नाम आते ही इस क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। भाजपा की इस घोषणा से साफ हो गया है कि वह सपा के सामने मजबूत चुनौती पेश करने जा रही है।

13 नवंबर को चुनाव, 23 को आएंगे नतीजे

उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को उपचुनाव होंगे, और नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। सिसमऊ पर भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला होगा, और यह देखना दिलचस्प होगा कि सुरेश अवस्थी अपने अनुभव से सपा के गढ़ को तोड़ पाते हैं या नहीं।

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