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यूपी जनगणना: बाधा डालने पर होगी 3 साल की जेल, सरकार ने जारी की सख्त अधिसूचना

यूपी सरकार ने जनगणना के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए अधिसूचना जारी की है। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत कार्य में बाधा डालने या लापरवाही करने पर 3 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान किया गया है, ताकि सर्वेक्षण सुचारू रूप से हो सके।

Mayank Yadav by Mayank Yadav
January 21, 2026
in उत्तर प्रदेश, क्राइम
UP Census
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UP Census 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में आगामी जनगणना को लेकर औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें प्रशासनिक तैयारियों के साथ-साथ कड़े कानूनी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। शासन द्वारा मंगलवार को जारी इस अधिसूचना के तहत मंडल से लेकर तहसील स्तर तक के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 का क्रियान्वयन है, जिसके अनुसार जनगणना कार्य में जानबूझकर बाधा उत्पन्न करने, गलत जानकारी देने या ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर दोषियों को 1,000 रुपये तक के जुर्माने के साथ तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। यह कदम प्रक्रिया की गंभीरता और डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

प्रशासनिक ढांचा और उत्तरदायित्व

UP Census प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार ने एक त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है। अधिसूचना के अनुसार:

  • मंडलायुक्त: मंडल जनगणना अधिकारी की भूमिका निभाएंगे।

  • जिलाधिकारी (DM): जिले के प्रमुख जनगणना अधिकारी होंगे।

  • एडीएम (वित्त एवं राजस्व): जिला जनगणना अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।

  • सहायक अधिकारी: बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी और जिला पंचायतराज अधिकारी को अपर जिला जनगणना अधिकारी नामित किया गया है।

स्थानीय स्तर पर, एसडीएम को उप जनगणना अधिकारी और तहसीलदारों को ‘चार्ज अफसर’ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यही व्यवस्था नगर निगमों, नगर पालिकाओं और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भी लागू की गई है ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में डेटा संग्रह निर्बाध रूप से चल सके।

मई-जून में शुरू होगा ‘हाउस सर्वे’

UP Census का पहला चरण मई और जून के बीच ‘हाउस सर्वे’ (मकान सूचीकरण) के रूप में शुरू होने की संभावना है। इस दौरान प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर संसाधनों, परिवार की स्थिति और अन्य बुनियादी जानकारी जुटाएंगे। इस चरण से पहले सभी संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सख्त कानून की आवश्यकता क्यों?

UP Census का डेटा भविष्य की सरकारी योजनाओं, संसाधनों के आवंटन और नीति निर्धारण के लिए आधार बनता है। अक्सर फील्ड वर्क के दौरान प्रगणकों को असहयोग या गलत सूचना का सामना करना पड़ता है। धारा 11 के तहत सजा का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि नागरिक और कर्मचारी दोनों ही इस राष्ट्रीय कार्य को प्राथमिकता दें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा, जिससे इस वृहद अभ्यास की शुचिता बनी रहे।

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Tags: UP Census
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