यूपी के बाबूओं की चमकी किस्मत: वेतन में भारी बढ़ोत्तरी, अब हर महीने मिलेंगे 3000 ज्यादा!

उत्तर प्रदेश के एडेड जूनियर हाईस्कूलों के लिपिकों का ग्रेड वेतन ₹1900 से ₹2000 करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। वहीं, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 'जीरामजी' योजना के तहत 125 दिन रोजगार और बेरोजगारी भत्ते की घोषणा की है।

UP Rent Agreement Rules UP Clerk

UP Clerk Salary Increase: उत्तर प्रदेश के 3,049 अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत 1,700 से अधिक लिपिकों के लिए नए साल की शुरुआत एक बड़ी खुशखबरी के साथ हुई है। शिक्षा निदेशालय ने इन कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए UP Clerk के ग्रेड वेतन को ₹1900 से बढ़ाकर ₹2000 करने का औपचारिक प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इस बदलाव से प्रत्येक UP Clerk लिपिक के मासिक वेतन में औसतन ₹3,000 की वृद्धि होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, गोरखपुर में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी ‘जीरामजी’ योजना का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि अब मनरेगा की तर्ज पर मजदूरों को 100 के बजाय 125 दिन का काम मिलेगा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नई तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

लिपिक वेतन वृद्धि: मुख्य बिंदु

अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामताराम पाल द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर शासन ने सक्रियता दिखाते हुए वित्तीय भार का ब्यौरा मांगा है।

  • विद्यालयों का विवरण: प्रदेश के आजमगढ़ (118), जौनपुर (109) और प्रयागराज (106) जिलों में सर्वाधिक एडेड स्कूल हैं।

  • प्रशासनिक कदम: संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय ने 29 दिसंबर को कर्मचारियों की सटीक संख्या और बजट पर पड़ने वाले प्रभाव की रिपोर्ट मांगी है।

  • न्यूनतम उपस्थिति: ललितपुर, सोनभद्र और श्रावस्ती जैसे जिलों में इन विद्यालयों की संख्या सबसे कम है, जहाँ के लिपिकों को भी इस निर्णय का सीधा लाभ मिलेगा।

‘जीरामजी’ योजना: रोजगार की नई गारंटी

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत जी राम जी’ योजना का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना है।

  1. बढ़ा हुआ कार्यदिवस: अब ग्रामीणों को वर्ष में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाएगी।

  2. बेरोजगारी भत्ता: यदि आवेदन के बाद भी रोजगार नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार बेरोजगारी भत्ता देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगी।

  3. वित्तीय संरचना: इस योजना में 60% व्यय केंद्र सरकार और 40% राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

  4. कृषि अनुकूल कार्ययोजना: खेती के पीक सीजन (बुआई और कटाई) के दौरान 60 दिनों के लिए काम से छूट दी गई है, ताकि किसान अपनी फसलों पर ध्यान दे सकें।

यह दोनों निर्णय उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों और ग्रामीण श्रमिकों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

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