UP Electricity News Smart Meter Refund: उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने नई ‘कॉस्ट डाटा बुक’ जारी करते हुए बिजली कंपनियों द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर की गई अतिरिक्त वसूली को वापस करने का निर्देश दिया है। आयोग ने पाया कि बिजली कंपनियों ने बिना अनुमति सिंगल फेस मीटर के लिए ₹6016 वसूले थे, जबकि इसकी वास्तविक लागत मात्र ₹2800 निर्धारित की गई है।
इस मनमानी दर के कारण 10 सितंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 के बीच मीटर लगवाने वाले करीब 3.18 लाख उपभोक्ताओं से लगभग 102 करोड़ रुपये अधिक लिए गए। अब यह अतिरिक्त राशि उपभोक्ताओं के आगामी बिजली बिलों में समायोजित (Adjust) की जाएगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रीपेड या पोस्टपेड मोड का चुनाव पूरी तरह उपभोक्ता की सहमति पर निर्भर करेगा।
प्रमुख बिंदु: नियामक आयोग का बड़ा फैसला
-
UP Electricity निर्धारित दरें बनाम वसूली: आयोग ने सिंगल फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अधिकतम कीमत ₹2800 और थ्री फेस के लिए ₹4100 तय की है। इसके विपरीत, कंपनियों ने क्रमशः ₹6016 और ₹11341 की वसूली शुरू कर दी थी।
-
रिफंड की प्रक्रिया: बिजली कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट कर 12 जनवरी 2026 तक नई दरों को लागू करना होगा। जिन उपभोक्ताओं ने अधिक भुगतान किया है, उनका पैसा उनके बिजली बिल के माध्यम से वापस किया जाएगा।
-
उपभोक्ता का अधिकार: विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का हवाला देते हुए उपभोक्ता परिषद ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों मोड में सक्षम हैं। अतः उपभोक्ता की सहमति के बिना उन्हें प्रीपेड मोड पर मजबूर नहीं किया जा सकता।
लागत का तुलनात्मक विवरण
| मीटर का प्रकार | आयोग द्वारा तय कीमत | कंपनियों द्वारा वसूली गई कीमत |
| सिंगल फेस मीटर | ₹2800 | ₹6016 |
| थ्री फेस मीटर | ₹4100 | ₹11341 |
इस UP Electricity ऐतिहासिक निर्णय के बाद उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और आयोग के अध्यक्ष से मुलाकात कर आभार व्यक्त किया है। आयोग के इस कड़े रुख से बिजली कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगने की उम्मीद है।
