UP housing costing guidelines: उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद की संपत्तियों को खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है। आवास विभाग ने अपनी ‘कॉस्टिंग गाइडलाइन’ में बड़े बदलाव करते हुए अब खाली पड़े फ्लैटों और संपत्तियों को ‘सेल’ के माध्यम से रियायती दरों पर बेचने का निर्णय लिया है। नई UP housing गाइडलाइन के अनुसार, यदि कोई संपत्ति विज्ञापन और ‘पहले आओ-पहले पाओ’ जैसी योजनाओं के बावजूद तीन से चार वर्षों तक नहीं बिकती है, तो उसे विशेष सेल के तहत बोर्ड की मंजूरी से बेचा जा सकेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्राधिकरणों के पास फंसी भारी पूंजी को मुक्त करना और संपत्तियों के रखरखाव पर होने वाले खर्च को कम करना है।
बल्क खरीदारी पर 15% तक की रियायत
नई UP housing गाइडलाइन की सबसे बड़ी विशेषता ‘बल्क सेल’ का प्रावधान है। यदि कोई संस्था या विभाग एक साथ कई फ्लैट खरीदता है, तो उसे आकर्षक छूट दी जाएगी:
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10 से 25 फ्लैट: 5 प्रतिशत की छूट।
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26 से 50 फ्लैट: 10 प्रतिशत की छूट।
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50 से अधिक फ्लैट: 15 प्रतिशत तक की बड़ी राहत।
यह प्रावधान निजी कंपनियों, सरकारी विभागों और उन संस्थाओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा जो अपने कर्मचारियों के लिए आवासीय परिसर की तलाश में हैं।
EWS और LIG वर्ग को विशेष राहत
निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए घर का सपना पूरा करना अब और भी आसान होगा। प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद द्वारा मंजूर की गई नई गाइडलाइन में ईडब्ल्यूएस (EWS) भवनों पर ब्याज दर को 5 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि किश्त जमा करने में देरी (डिफ़ॉल्ट) होने पर अब चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) नहीं लिया जाएगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम हो जाएगा।
क्यों पड़ी ‘सेल’ की जरूरत?
उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में करीब 7,000 से अधिक फ्लैट्स खाली पड़े हैं। कई योजनाओं में काम पूरा होने के वर्षों बाद भी केवल 50% से 60% ही बिक्री हो पाई है। विकास प्राधिकरणों का पैसा इन संपत्तियों में फंसे होने के साथ-साथ इनके रख-रखाव और सुरक्षा पर अतिरिक्त खर्च हो रहा था। पूर्व में ‘पहले आओ-पहले पाओ’ नीति अपनाने के बावजूद खरीदारों ने अधिक दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिसके बाद सरकार को कीमतों में रियायत और ‘सेल’ जैसे विकल्पों को मंजूरी देनी पड़ी।


