Fake Registry to Be Stopped: उत्तर प्रदेश में भू-माफिया या जालसाज किसी की जमीन को फर्जी गवाहों और नकली पहचान पत्रों के सहारे आसानी से नहीं बेच पाएंगे। लंबे समय से जमीन की रजिस्ट्री में हो रहे फर्जीवाड़े को देखते हुए सरकार ने सख्त फैसला लिया है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बड़ी खामियों का फायदा उठाकर जालसाज बेधड़क फर्जी रजिस्ट्रियां करवा रहे थे, लेकिन अब इस पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी कर ली गई है।
1 फरवरी से लागू होगी नई व्यवस्था
उत्तर प्रदेश की महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने सभी सहायक महानिरीक्षक निबंधन को शासनादेश जारी कर दिए हैं। इसके तहत 1 फरवरी से प्रदेश भर में रजिस्ट्री की नई व्यवस्था लागू की जाएगी। लखनऊ के सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वितीय रमेश कुमार ने बताया कि अब “उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज पंजीकरण नियमावली 2024” के तहत जमीन बेचने वाले, खरीदने वाले और गवाहों की पहचान बायोमीट्रिक तरीके से की जाएगी।
आधार और बायोमीट्रिक होगा जरूरी
नई व्यवस्था में दस्तावेजों पर सिर्फ आधार आधारित ई-हस्ताक्षर को ही कानूनी मान्यता दी जाएगी। रजिस्ट्री से पहले सभी जानकारी सॉफ्टवेयर के जरिए ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। रजिस्ट्री वाले दिन क्रेता, विक्रेता और गवाहों के अंगूठे के निशान सीधे आधार डेटाबेस से मिलाए जाएंगे। अगर किसी का अंगूठा आधार रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट दे देगा और रजिस्ट्री आगे नहीं बढ़ेगी। इसके साथ ही मौके पर ही फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
पहले क्यों होती थी गड़बड़ी
अब तक की प्रक्रिया में क्रेता, विक्रेता और गवाह जो भी पहचान पत्र लाते थे, उनके सत्यापन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। उपनिबंधक के सामने पेश किए गए दस्तावेजों को बिना जांच के आगे बढ़ा दिया जाता था। इसी कारण फर्जी आईडी के सहारे रजिस्ट्रियां हो जाती थीं। इस लापरवाही का फायदा उठाकर भू-माफिया और दलाल आसानी से खेल कर जाते थे।
पुराने मामलों से खुली पोल
दरअसल आधार को रजिस्ट्री से जोड़ने की योजना कई सालों से चर्चा में थी। 25 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टांप और रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में रजिस्ट्रियों में हो रहे फर्जीवाड़े पर नाराजगी जताई थी और सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे। सिर्फ लखनऊ में ही बीते एक साल में दो दर्जन से ज्यादा मामले सामने आए, जहां फर्जी पहचान पत्रों के जरिए रजिस्ट्री कर दी गई।
जेल में बंद आरोपी के नाम रजिस्ट्री
एक चौंकाने वाले मामले में शाइन सिटी के निदेशक अमिताभ श्रीवास्तव, जो उस समय वाराणसी जेल में बंद था, उसके नाम पर लखनऊ में रजिस्ट्री हो गई। रिकॉर्ड में दिखाया गया कि वह 24 अगस्त 2022 को निबंधन कार्यालय आया था, जबकि जांच में साफ हुआ कि वह जेल से बाहर ही नहीं निकला था। ऐसे कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई।
नई व्यवस्था से क्या होगा फायदा
अब बायोमीट्रिक और आधार लिंकिंग से ऐसी गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी। सही व्यक्ति की पहचान पक्की होगी और आम लोगों की जमीन सुरक्षित रहेगी।
