UP MPs wealth increase: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की हालिया विश्लेषण रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति में जनप्रतिनिधियों की आर्थिक प्रगति पर एक नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से 2024 के बीच दोबारा निर्वाचित हुए सांसदों की संपत्ति में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। उत्तर प्रदेश के 15 सांसदों पर केंद्रित इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम फर्रुखाबाद के भाजपा सांसद मुकेश राजपूत का है, जिनकी संपत्ति महज 10 वर्षों में लखपति से बढ़कर करोड़ों में पहुंच गई है। 2014 में 7.25 लाख रुपये की संपत्ति घोषित करने वाले राजपूत की संपत्ति 2024 तक 9.36 करोड़ रुपये पार कर गई, जो 12821 प्रतिशत की अविश्वसनीय वृद्धि दर्शाती है। यह वृद्धि दर यूपी के अन्य सभी दिग्गजों की तुलना में कहीं अधिक है।
यूपी के सांसदों की संपत्ति का विश्लेषण
एडीआर ने देशभर के 102 पुन: निर्वाचित सांसदों के शपथपत्रों का अध्ययन किया, जिसमें उत्तर प्रदेश के सांसदों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। संपत्ति वृद्धि के मामले में टॉप-5 सांसदों में मुकेश राजपूत के अलावा डुमरियागंज के जगदंबिका पाल, गोंडा के कृष्णवर्धन सिंह और अलीगढ़ के सतीश गौतम जैसे नाम शामिल हैं। इन सांसदों ने संपत्ति बढ़ाने के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे कद्दावर नेताओं को भी पीछे छोड़ दिया है।
सतीश गौतम और अन्य दिग्गजों का हाल
अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम की संपत्ति में 208 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। 2014 में उनकी संपत्ति ₹5.21 करोड़ थी, जो 2024 में ₹16.06 करोड़ हो गई। आंकड़ों के लिहाज से उनकी आय में प्रतिदिन लगभग ₹29,710 का इजाफा हुआ।
अन्य प्रमुख नेताओं की संपत्ति में वृद्धि कुछ इस प्रकार रही:
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जगदंबिका पाल (डुमरियागंज): 986% की भारी वृद्धि।
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कृष्णवर्धन सिंह (गोंडा): 396% का इजाफा।
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राजनाथ सिंह (लखनऊ): 152% की बढ़त।
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डॉ. भोला सिंह (बुलंदशहर): 186% की वृद्धि।
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नरेंद्र मोदी (वाराणसी): 82% की वृद्धि।
एक नजर आंकड़ों पर (तालिका)
सांसद |
क्षेत्र |
संपत्ति वृद्धि (%) |
मुकेश राजपूत |
फर्रुखाबाद |
12821% |
जगदंबिका पाल |
डुमरियागंज |
986% |
सतीश गौतम |
अलीगढ़ |
208% |
राजनाथ सिंह |
लखनऊ |
152% |
हेमा मालिनी |
मथुरा |
57% |
यह रिपोर्ट दर्शाती है कि राजनीति की पिच पर न केवल इन नेताओं का (UP MPs wealth increase) कद बढ़ा है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति में भी क्रांतिकारी बदलाव आया है। जहां आम जनता महंगाई से जूझ रही है, वहीं जनप्रतिनिधियों की संपत्ति के ये आंकड़े लोकतंत्र के एक अलग पहलू को उजागर करते हैं।


