UP Police IPS Promotion: उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रशासनिक ढांचे में वर्तमान में एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। हालिया प्रमोशन और रिटायरमेंट के बाद विभाग में ऊंचे पदों (ADG और DIG) पर अफसरों की संख्या स्वीकृत पदों से काफी ज्यादा हो गई है, जबकि बीच की कड़ी यानी आईजी (IG) रैंक के अफसरों का टोटा पड़ गया है। राज्य में एडीजी के 21 स्वीकृत पदों के मुकाबले 36 अफसर तैनात हैं, वहीं डीआईजी के 51 पदों पर 66 अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके उलट, आईजी के 51 पदों पर केवल 33 अफसर ही उपलब्ध हैं। पदों का यह असंतुलन शासन के लिए सिरदर्द बन गया है कि आखिर इन ‘अतिरिक्त’ साहबों को कहां और कैसे अडजस्ट किया जाए।
पदों का गणित: कहीं ‘सरप्लस’ तो कहीं ‘शॉर्टेज’
UP Police में अधिकारियों की तैनाती का यह नया समीकरण प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति कुछ इस प्रकार है:
रैंक |
स्वीकृत पद |
वर्तमान अधिकारी |
स्थिति |
एडीजी (ADG) |
21 |
36 |
+15 (अधिक) |
आईजी (IG) |
51 |
33 |
-18 (कमी) |
डीआईजी (DIG) |
51 |
66 |
+15 (अधिक) |
बड़े पदों पर ‘ओवरलोडing’ का असर
एडीजी रैंक के अफसरों की अधिकता का आलम यह है कि कई महत्वपूर्ण कैडर पोस्ट पर उनसे भी सीनियर यानी डीजी (DG) स्तर के अफसर तैनात हैं। उदाहरण के लिए, 112 यूपी जो एडीजी स्तर का पद है, वहां डीजी नीरा रावत तैनात हैं। वहीं, कुछ एडीजी के पास दोहरे प्रभार हैं—एडीजी अमिताभ यश कानून-व्यवस्था के साथ आईजी एसटीएफ का पद भी संभाल रहे हैं।
आईजी की कमी और डीआईजी की चुनौती
UP Police आईजी रैंक में अफसरों की कमी का सबसे बड़ा असर फील्ड पर दिख रहा है। प्रदेश की 18 रेंज में से अधिकांश में आईजी की जगह डीआईजी स्तर के अधिकारियों को कमान सौंपी गई है। उधर, 2012 बैच के प्रमोशन के बाद डीआईजी की संख्या 66 पहुंच गई है। सरकार अब इस भीड़ को संभालने के लिए बड़े जिलों में एसएसपी के स्थान पर डीआईजी रैंक के अफसरों को तैनात करने और आईजी कैडर की रेंज में अतिरिक्त डीआईजी भेजने की योजना पर विचार कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2027 के प्रमोशन के बाद यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगी। सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन वरिष्ठ अधिकारियों के अनुभव का सही इस्तेमाल करने के साथ-साथ उनके प्रोटोकॉल के अनुरूप पद सृजित करने की होगी।







