UP voter list mapping: एसआईआर नोटिस पर सुनवाई शुरू, बुजुर्गों और बीमारों के लिए ऑनलाइन सुविधा

यूपी में 1.04 करोड़ मतदाताओं के लिए SIR नोटिस पर सुनवाई शुरू हो गई है। 2003 की सूची से मिलान न होने पर यह प्रक्रिया जारी है। बुजुर्ग और बीमार लोग ऑनलाइन पोर्टल के जरिए घर बैठे 13 वैकल्पिक दस्तावेजों से सत्यापन कर सकेंगे।

UP Voter List 2026 Panchayat Election

UP voter list mapping: उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य के करीब 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता, जिनका नाम वर्ष 2003 की पुरानी मतदाता सूची से मेल नहीं खा पाया है, उनके लिए निर्वाचन आयोग ने सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, यह चरण उन लोगों के लिए है जिन्हें ‘नो मैपिंग’ के कारण नोटिस जारी किए गए थे। विशेष राहत देते हुए, आयोग ने बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों के लिए घर बैठे ऑनलाइन जवाब देने या परिजनों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दी है, जिससे उन्हें मतदान केंद्रों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

प्रमुख बिंदु: एक नज़र में

विवरण

महत्वपूर्ण जानकारी

कुल प्रभावित मतदाता

1.04 करोड़ (जिनका मिलान 2003 की सूची से नहीं हुआ)

दावे व आपत्ति की अवधि

6 जनवरी से 6 फरवरी 2026

आधिकारिक पोर्टल

voters.eci.gov.in

जरूरी दस्तावेज

पासपोर्ट, निवास प्रमाण, शैक्षिक अभिलेख सहित कुल 13 विकल्प

नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि 6 जनवरी से शुरू हुआ दावे और आपत्तियों का दौर 6 फरवरी तक चलेगा। बुधवार से उन मतदाताओं की सुनवाई शुरू हो गई है जिन्हें नोटिस तामील कराए जा चुके हैं। जो मतदाता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने में असमर्थ हैं, वे चुनाव आयोग के पोर्टल पर जाकर ‘SIR’ कॉलम में अपनी वोटर आईडी (EPIC) संख्या दर्ज कर नोटिस की स्थिति देख सकते हैं।

बुजुर्ग और बीमार UP voter list mapping मतदाताओं के परिजन उनकी ओर से ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। सत्यापन के लिए निर्वाचन आयोग ने 13 अलग-अलग दस्तावेजों को मान्यता दी है, जिनमें पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र और शैक्षिक रिकॉर्ड प्रमुख हैं।

आयु के अनुसार दस्तावेजों की अनिवार्यता

वोटर लिस्ट में नाम बनाए रखने के लिए आयु के आधार पर अलग-अलग नियम तय किए गए हैं:

  1. 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे: केवल स्वयं के पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज देने होंगे।

  2. 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे: स्वयं के साथ-साथ पिता के दस्तावेज भी अनिवार्य हैं।

  3. 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे: मतदाता को अपने साथ माता और पिता दोनों के प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

सत्यापन का अगला चरण

राजधानी लखनऊ के चिनहट और बीकेटी क्षेत्रों में बुधवार को विशेष शिविर लगाकर सुनवाई की गई। जिन UP voter list mapping मतदाताओं ने अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए हैं, उनकी प्रमाणिकता की जांच के बाद उन्हें अंतिम सत्यापन के लिए आगे भेज दिया गया है। आयोग का लक्ष्य है कि कोई भी वास्तविक मतदाता सूची से बाहर न छूटे, बशर्ते वे अपनी नागरिकता और निवास के साक्ष्य उपलब्ध करा दें।

यदि आप भी अपनी मतदाता स्थिति को लेकर असमर्थित हैं, तो तत्काल पोर्टल पर जाकर अपना विवरण जांचें।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, भ्रष्टाचार से जंग में राज्य पुलिस की ताकत बढ़ी, सीबीआई का एकाधिकार खत्म

Exit mobile version