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यूपी वालों की मौज: अब आधी कीमत में लगेगा बिजली कनेक्शन, स्मार्ट मीटर के दाम भी गिरे!

UPERC UP Electricity

UPERC Cost Data Book 2025: उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए नया साल बड़ी राहत लेकर आया है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने ‘कॉस्ट डाटा बुक 2025’ को मंजूरी दे दी है, जिससे अब नया बिजली कनेक्शन लेना न केवल सस्ता होगा बल्कि इसकी प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी हो जाएगी। स्मार्ट मीटर की कीमतों में 50% से अधिक की भारी कटौती की गई है और अविकसित कॉलोनियों में बुनियादी ढांचे के नाम पर ली जाने वाली अतिरिक्त वसूली पर भी रोक लगा दी गई है। यह नई व्यवस्था अगले दो वर्षों (2027 के अंत) तक प्रभावी रहेगी, जिससे करोड़ों उपभोक्ताओं को वित्तीय राहत मिलेगी।

क्या होती है कॉस्ट डाटा बुक?

UPERC कॉस्ट डाटा बुक एक आधिकारिक दस्तावेज है जो बिजली उपभोक्ताओं से लिए जाने वाले विभिन्न शुल्कों (Charges) को निर्धारित करता है। इसमें नया कनेक्शन लेने के लिए आवश्यक सामग्री, लेबर चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और मीटर की कीमत का पूरा विवरण होता है। चूंकि इसे 6 साल बाद (पिछला 2019 में) अपडेट किया गया है, इसलिए इसमें मौजूदा बाजार दरों और नई तकनीकों को शामिल किया गया है।

स्मार्ट मीटर की दरों में भारी कटौती

UPERC सबसे बड़ी राहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमतों में मिली है। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन के ₹8000 से अधिक के प्रस्ताव को खारिज करते हुए नई दरें तय की हैं:

मीटर का प्रकार पुरानी दर (UPPCL वसूली) नई स्वीकृत दर (2025) कुल बचत
सिंगल फेज स्मार्ट मीटर ₹6,016 ₹2,800 ₹3,216
थ्री फेज स्मार्ट मीटर ₹11,342 ₹4,100 ₹7,242

विशेष सुविधा: बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) उपभोक्ताओं के लिए मीटर की कीमत 24 आसान किस्तों में चुकाने का विकल्प दिया गया है।

आम जनता और कॉलोनियों को मिलने वाले मुख्य लाभ

1. अविकसित कॉलोनियों को अब ‘इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज’ नहीं देना होगा

अब तक अविकसित या गैर-विद्युतीकृत कॉलोनियों में नया कनेक्शन लेने पर उपभोक्ताओं से खंभे और तार जैसे बुनियादी ढांचे के लिए अतिरिक्त पैसा लिया जाता था। आयोग ने इसे खत्म कर दिया है क्योंकि इसके लिए विकास शुल्क (Development Charge) पहले ही वसूला जाता है। अब इन क्षेत्रों में केवल मीटरिंग शुल्क देना होगा।

2. एस्टीमेट सिस्टम का सरलीकरण

पहले पोल से 40 मीटर से अधिक दूरी होने पर अलग से एस्टीमेट बनता था, जो काफी महंगा पड़ता था। अब:

  • 300 मीटर तक: 150 किलोवाट तक के कनेक्शन के लिए कोई अलग एस्टीमेट नहीं बनेगा। इसे एक तय राशि पर ही दिया जाएगा।

  • दूरी के स्लैब: दूरी को 100 मीटर, 101-300 मीटर और 301 मीटर से अधिक के तीन स्लैब में बांटा गया है।

  • लागत: उदाहरण के लिए, 100 मीटर तक 2 किलोवाट कनेक्शन के लिए केवल ₹5,500 देने होंगे।

3. ₹100 करोड़ के रिफंड की तैयारी

9 सितंबर 2025 से जो नए कनेक्शन दिए गए थे, उन पर UPPCL अनंतिम (Interim) रूप से अधिक पैसे वसूल रहा था। अब दरें तय होने के बाद, उपभोक्ता परिषद के अनुसार लगभग ₹100 करोड़ से अधिक की राशि उपभोक्ताओं को वापस की जाएगी या उनके बिजली बिलों में एडजस्ट की जाएगी।

अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

  • बैंक गारंटी का विकल्प: ₹20 लाख UPERC से अधिक की सिक्योरिटी जमा करने वाले उपभोक्ताओं को अब बैंक गारंटी का विकल्प मिलेगा।

  • AMI लागत से राहत: एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालन का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं लिया जाएगा, क्योंकि यह केंद्र की आरडीएसएस (RDSS) योजना के तहत कवर है।

  • निजी ट्यूबवेल (PTW): साझा ट्रांसफार्मर से कनेक्शन लेने वाले किसानों के लिए लागत का हिस्सा 50% से घटाकर 33.3% कर दिया गया है।

इस नई नियमावली से बिजली विभाग में भ्रष्टाचार और ओवर-बिलिंग पर लगाम लगने की उम्मीद है, जिससे आम आदमी के लिए बिजली पहुंच अधिक सुलभ हो जाएगी।

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