Western UP Meerut AIIMS High Court Bench: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों के लिए दशकों पुराने दो बड़े सपने—मेरठ में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना और इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच—अब हकीकत बनने की दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं। उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर इन मांगों को आगामी केंद्रीय बजट में शामिल करने का पुरजोर अनुरोध किया है।
प्रमुख अंश: बजट और विकास की नई उम्मीद
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बजट में शामिल करने का प्रस्ताव: वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने केंद्र सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि पश्चिमी यूपी की इन बुनियादी जरूरतों को अब और टाला नहीं जा सकता।
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स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: मेरठ में एम्स की स्थापना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि क्षेत्र के मरीजों को गंभीर इलाज के लिए दिल्ली के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और बागपत जैसे जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।
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सस्ता और सुलभ न्याय: हाईकोर्ट बेंच की मांग के पीछे तर्क दिया गया है कि प्रयागराज (इलाहाबाद) की दूरी अधिक होने के कारण वादकारियों का समय और पैसा दोनों अत्यधिक खर्च होते हैं।
राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का बयान
राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस घटनाक्रम की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने न केवल स्वास्थ्य और न्याय, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भी केंद्र से सहयोग मांगा है।
“हमने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनभावनाओं को केंद्र तक पहुंचाया है। एम्स और हाईकोर्ट बेंच इस क्षेत्र की बुनियादी जरूरतें हैं। प्रदेश सरकार ने इन प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगा दी है, जिससे अब गेंद केंद्र के पाले में है।”
क्या बदलेगी पश्चिमी यूपी की सूरत?
यदि आगामी बजट में इन प्रस्तावों को हरी झंडी मिलती है, तो यह Western UP क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ होगा। वर्तमान में, पश्चिमी यूपी के लोगों को कानूनी कार्यों के लिए लगभग 600-700 किलोमीटर का सफर तय कर प्रयागराज जाना पड़ता है। इसी तरह, स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी एम्स जैसे संस्थान की कमी लंबे समय से खल रही है।
राज्य सरकार की इस सक्रियता ने उन Western UP प्रदर्शनकारियों और संगठनों को नई उम्मीद दी है जो पिछले कई दशकों से हाईकोर्ट बेंच के लिए आंदोलन कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह इंतजार कब खत्म होगा।


