Western UP Smart Meter Problem:उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी सामने आई है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम (PVVNL) के अंतर्गत आने वाले करीब एक लाख उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर में बैलेंस की गिनती गड़बड़ा गई है। सिस्टम में बार-बार तकनीकी खराबी आने के कारण कई उपभोक्ताओं का बैलेंस अचानक शून्य दिखने लगा है। इससे न केवल बिजली की खपत का सही आंकलन प्रभावित हो रहा है, बल्कि रिचार्ज के बाद भी लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
यह समस्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 13 जिलों के उपभोक्ताओं को प्रभावित कर रही है। हाल ही में पावर कॉरपोरेशन की एक बैठक में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने खुद माना कि स्मार्ट मीटर से जुड़ा पूरा सिस्टम कुछ समय के लिए नियंत्रण से बाहर हो गया था।
स्मार्ट मीटर सिस्टम पूरी तरह फेल
रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्ट मीटर के बैलेंस को लेकर पहले भी उपभोक्ता शिकायतें करते रहे हैं, लेकिन इतने बड़े स्तर पर सिस्टम फेल होने की यह पहली घटना है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि 11 दिसंबर को साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट के दौरान कई बार तकनीकी दिक्कत आई। इसी दौरान बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के मीटर में बैलेंस शून्य दिखने लगा।
करीब एक लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर में शुल्क और बैलेंस की गणना करने वाला सिस्टम सही तरह से काम नहीं कर पाया। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति पर पड़ा।
किन जिलों में ज्यादा परेशानी
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, बागपत, शामली, हापुड़, अमरोहा और संभल जिले आते हैं। इन सभी जिलों में स्मार्ट मीटर लगे उपभोक्ता इस समस्या से जूझ रहे हैं।
निगम ने यह भी स्वीकार किया है कि वह अपने डाटा प्रबंधन के लिए पूरी तरह एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर पर निर्भर है। जैसे ही सर्विस प्रोवाइडर के सिस्टम में दिक्कत आई, पूरा डेटा सिस्टम प्रभावित हो गया।
10 महीने बाद भी समाधान नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस समस्या को सामने आए करीब 10 महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक डाटा रिकवरी या सही बैलेंस दिखाने का कोई ठोस तरीका नहीं निकाला जा सका है। कई जिलों, खासकर शामली में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां उपभोक्ताओं ने समय पर रिचार्ज किया, फिर भी उन्हें बिजली नहीं मिल सकी।
उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर सुविधा के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है। बैलेंस शून्य दिखने पर सप्लाई बंद हो जाती है और शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं मिलता।
उपभोक्ताओं की बढ़ती चिंता
इस तकनीकी गड़बड़ी से उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि जब तक सिस्टम पूरी तरह ठीक न हो, तब तक स्मार्ट मीटर योजना पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। वहीं, निगम का कहना है कि समस्या को दूर करने के लिए सर्विस प्रोवाइडर से लगातार संपर्क किया जा रहा है और जल्द ही समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।


