YEIDA Greater Noida Farmers: ग्रेटर नोएडा में किसानों की आबादी भूमि से जुड़े सालों पुराने विवादों को खत्म करने के लिए यमुना प्राधिकरण (YEIDA) ने एक ठोस रणनीति तैयार की है। प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने घोषणा की है कि लंबित 367 मामलों को अब चार विशिष्ट श्रेणियों में वर्गीकृत कर उनका समाधान किया जाएगा। इस योजना के तहत मुआवजा न लेने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि मुआवजा लेकर जमीन पर कब्जा बनाए रखने वाले मामलों में वसूली की कार्रवाई होगी। प्राधिकरण 2012 की सैटेलाइट मैपिंग और पुराने राजस्व रिकॉर्ड्स का मिलान कर रहा है ताकि उन विसंगतियों को सुधारा जा सके जिनके कारण किसान वर्षों से परेशान हैं। इस ऐतिहासिक फैसले से औद्योगिक विकास की राह साफ होगी और किसानों को उनकी हक की जमीन वापस मिल सकेगी।
यमुना प्राधिकरण का बड़ा फैसला: 4 श्रेणियों में सुलझेंगे किसानों के जमीन विवाद
यमुना विकास प्राधिकरण YEIDA ने स्पष्ट किया है कि हर किसान की समस्या अलग है, इसलिए एक ही नियम सब पर लागू नहीं किया जा सकता। विवादों को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
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प्रथम श्रेणी: वे किसान जिन्होंने मुआवजा नहीं लिया है और केवल अपनी आबादी की जमीन वापस चाहते हैं। इन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
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द्वितीय श्रेणी: जिन्होंने मुआवजा ले लिया है, लेकिन अतिरिक्त भूमि पर हक जता रहे हैं। इनका निस्तारण वार्ता के जरिए होगा।
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तृतीय श्रेणी: मुआवजा लेने के बाद भी जमीन खाली न करने वालों से ब्याज सहित वसूली पर निर्णय होगा।
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चतुर्थ श्रेणी: वे जटिल मामले जहाँ अधिक मुआवजा लेने के बाद भी तीन गुना अतिरिक्त राशि की मांग की जा रही है।
रिकॉर्ड की चुनौतियां और समाधान
YEIDA प्राधिकरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2012 की सैटेलाइट मैपिंग है, जिसमें कई गांवों की आबादी का डिजिटल रिकॉर्ड वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। अब 2003-04 के पुराने नक्शों की दोबारा जांच की जा रही है। वर्तमान में 88 मामले लीजबैक और 279 मामले शिफ्टिंग से संबंधित हैं। प्राधिकरण का लक्ष्य वास्तविक हकदारों को राहत देकर वर्षों से चले आ रहे इन कानूनी और सामाजिक विवादों का स्थायी समाधान करना है।