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CJP Protest: जंतर-मंतर प्रदर्शनकारी का कमरा खाली कराने का दावा, सोशल मीडिया पर बढ़ा नया विवाद

Neeshu Azad CJP Protest

CJP Protest : जंतर-मंतर पर हुए CJP विरोध प्रदर्शन के बाद उससे जुड़े कई चेहरे लगातार चर्चा में हैं। इसी बीच प्रदर्शन में शामिल रहीं नीशू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि उन्हें अपने किराये का कमरा खाली करने के लिए कहा गया है और इसकी वजह उनके जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने को बताया गया। हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कमरा खाली कराने का किया दावा

वायरल वीडियो में नीशू कहती हैं कि यदि वह जंतर-मंतर नहीं गई होतीं तो शायद उन्हें यह स्थिति नहीं झेलनी पड़ती। उनके मुताबिक, मकान मालिक ने उनसे कहा कि दोनों के विचार मेल नहीं खाते, इसलिए उन्हें कमरा खाली करना होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब उन्हें नया कमरा लेना पड़ा है, जहां पहले की तुलना में दोगुना किराया देना पड़ रहा है। वीडियो में उन्होंने लोगों से खुद फैसला करने की अपील की कि प्रदर्शन में जाने का उन्हें फायदा हुआ या नुकसान।

पुराने बयानों पर भी उठे सवाल

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उनके पुराने बयानों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई। एक्स (X) पर कुछ यूजर्स ने पहले किए गए उनके दावों का हवाला देते हुए सवाल उठाए। एक पोस्ट में यह दावा किया गया कि कुछ समय पहले नीशू ने अपने पिता पर हमले का आरोप लगाया था और अब उसी घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

नीशू के वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ यूजर्स उनके समर्थन में अपनी बात रख रहे हैं, जबकि कई अन्य लोग वीडियो साझा कर उनकी आलोचना कर रहे हैं। कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि CJP प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और इन्हें सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल नीशू के कमरे से निकाले जाने के दावे, सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों और वायरल पोस्ट की किसी आधिकारिक एजेंसी या स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों को सावधानी के साथ देखना जरूरी है। मामले में यदि संबंधित पक्ष या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है, तो उससे स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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