Government Formation: तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 234 में से 108 सीटें जीत लीं। हालांकि सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में पार्टी अभी भी 10 सीट पीछे है।
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह विजय को समर्थन देने के लिए तैयार है। लेकिन कांग्रेस के पास सिर्फ पांच विधायक हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए विजय को अभी भी पांच और विधायकों की जरूरत पड़ेगी।
छोटे दलों ने बढ़ाई परेशानी
सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि तमिलनाडु के ज्यादातर छोटे दल डीएमके गठबंधन का हिस्सा हैं। वीसीके, सीपीएम, सीपीआई और एमडीएमके जैसे दल पहले से स्टालिन के साथ हैं। वीसीके ने साफ कर दिया है कि वह डीएमके का साथ नहीं छोड़ेगी। वहीं एमडीएमके नेता वाइको ने भी डीएमके के साथ बने रहने की बात कही है। लेफ्ट पार्टियों ने अभी अपना रुख पूरी तरह साफ नहीं किया है।
अगर ये सभी छोटे दल विजय को समर्थन दे दें, तो उनका आंकड़ा बहुमत से आगे निकल सकता है। लेकिन इतनी छोटी बढ़त वाली सरकार कितनी स्थिर रहेगी, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
डीएमके और AIADMK के साथ आने की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में अब एक नई चर्चा शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि द्रविड़ राजनीति को बचाने के लिए डीएमके और AIADMK साथ आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो विजय के लिए सरकार बनाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। हालांकि दोनों दल लंबे समय से एक-दूसरे के बड़े विरोधी रहे हैं, लेकिन सत्ता की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
होटल में जुटाए गए विधायक
सरकार गठन को लेकर जारी हलचल के बीच विजय की पार्टी ने अपने सभी विधायकों को महाबलीपुरम के एक होटल में ठहराया है। पार्टी किसी भी तरह की टूट-फूट या दबाव की राजनीति से बचना चाहती है।
विजय की कोशिश है कि पहले अपने विधायकों को एकजुट रखा जाए और उसके बाद दूसरे दलों से समर्थन हासिल किया जाए।
AIADMK में भी अंदरूनी हलचल
इस बीच AIADMK विधायक लीमारोज मार्टिन के बयान ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी की विजय से बातचीत चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, AIADMK के अंदर दो राय बनी हुई हैं। एक पक्ष चाहता है कि पलानीस्वामी विजय को समर्थन दें। वहीं दूसरा गुट मानता है कि अगर नेतृत्व सहमत नहीं होता, तो कुछ विधायक अलग रास्ता अपना सकते हैं।
बीजेपी और कांग्रेस की शर्तें अलग
मामले को और उलझाने वाली बात बीजेपी और कांग्रेस की अलग-अलग रणनीति है। कांग्रेस चाहती है कि विजय के साथ बीजेपी की कोई भूमिका न हो। दूसरी तरफ बीजेपी नहीं चाहती कि कांग्रेस विजय सरकार का हिस्सा बने।
AIADMK का बीजेपी के साथ गठबंधन भी पलानीस्वामी के फैसले को मुश्किल बना रहा है। ऐसे में तमिलनाडु में सरकार किसकी बनेगी, यह अभी साफ नहीं हो पा रहा है।
अब सबकी नजर AIADMK की बैठक पर टिकी है। इस बैठक के बाद राज्य की राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।



