नियोमैक्स प्रॉपर्टीज और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रहे धन शोधन मामले में निवेशकों के लिए राहत की खबर है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने निवेशकों की रकम लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत 238.90 करोड़ रुपये की कुर्क संपत्तियों से निवेशकों को पैसा वापस दिलाया जाएगा। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य 800 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई
ईडी के चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय के मुताबिक, मद्रास हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर को इस मामले में अहम आदेश दिया था। अदालत ने निर्देश दिया कि ईडी की ओर से कुर्क की गई संपत्तियों को बेचकर मिलने वाली रकम उसकी निगरानी में पीड़ित निवेशकों को बांटी जाए।
इसी आदेश के बाद ईडी ने निवेशकों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया शुरू की है।
12 से 30 फीसदी रिटर्न का लालच
नियोमैक्स प्रॉपर्टीज और उसकी समूह कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने रियल एस्टेट प्लॉट परियोजनाओं में निवेश के नाम पर हजारों लोगों से बड़ी रकम जमा कराई।
निवेशकों को 12 से 30 प्रतिशत तक ब्याज और ऊंचे रिटर्न का भरोसा दिया गया था। आरोप है कि तय समय पूरा होने के बाद भी न तो निवेशकों को वादा किया गया रिटर्न मिला और न ही उन्हें भूखंड उपलब्ध कराए गए।
8 हजार करोड़ रुपये बकाया
ईडी की जांच में सामने आया कि कंपनी समूह ने हजारों निवेशकों से बड़ी रकम जुटाई थी। इसमें ज्यादातर पैसा नकद लिया गया। बाद में इस रकम को फर्जी कंपनियों, समूह की दूसरी कंपनियों और बाहरी संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया।
ईडी के मुताबिक, वादे किए गए रिटर्न सहित समूह पर निवेशकों का करीब 8,000 करोड़ रुपये बकाया है। आरोप है कि भुगतान की अवधि पूरी होने पर निवेशकों को पैसा लौटाने के बजाय दोबारा निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
238.90 करोड़ की संपत्तियां कुर्क
जांच के दौरान ईडी ने दो अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए थे। इनके तहत करीब 238.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं। इनमें अचल संपत्तियां, बैंक खाते और शेयर शामिल हैं।
इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मदुरै की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है।
14,540 निवेशकों ने की शिकायत
नियोमैक्स समूह का मामला जून 2023 में तमिलनाडु के मदुरै से सामने आया था। निवेशकों की शिकायतों के बाद आर्थिक अपराध शाखा ने जांच शुरू की।
मद्रास हाईकोर्ट में दाखिल पुलिस के जवाब के अनुसार, 2025 तक इस मामले में 14,540 शिकायतें दर्ज की गई थीं। इनमें करीब 1,882 करोड़ रुपये की रकम से जुड़े दावे शामिल थे। पुलिस ने 123 आरोपितों की पहचान की थी, जिनमें से 50 को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
















