PM Rahat Scheme: सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए पीएम राहत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारी तेज हो गई है। इसी सिलसिले में बुधवार को पुराने सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें परिवहन, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के अधिकारियों के साथ अस्पतालों की भूमिका पर चर्चा हुई।
कार्यशाला में डायल-112, टीएमएस 2.0 पोर्टल, पुलिस सत्यापन और आईरैड/ईडार प्रणाली के जरिए दुर्घटना पीड़ितों को सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया समझाई गई।
सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज
राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने बताया कि पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल पात्र व्यक्तियों को अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य हादसे के बाद शुरुआती समय में पीड़ित को बिना आर्थिक परेशानी के जरूरी चिकित्सा सुविधा दिलाना है।
उन्होंने कहा कि योजना का लाभ समय पर पहुंचाने के लिए पंजीकरण, सत्यापन और उपचार की प्रक्रिया को आसान बनाना जरूरी है।
गोल्डन ऑवर में इलाज मिलने से बच सकती है जान
स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं राज्य के सामने बड़ी चुनौती हैं। हादसे के बाद पहला एक घंटा यानी गोल्डन ऑवर बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान घायल को अस्पताल पहुंचाकर समय पर इलाज दिया जाए तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।
उन्होंने अस्पतालों से सड़क दुर्घटना के सभी पीड़ितों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही पीएम राहत योजना से जुड़े अस्पतालों की जानकारी गूगल मैप पर उपलब्ध कराने की जरूरत बताई, ताकि जरूरत के समय लोगों को नजदीकी अस्पताल खोजने में परेशानी न हो।
अस्पतालों और हाईवे पर लगाए जाएंगे जागरूकता बोर्ड
परिवहन सचिव राज कुमार ने कहा कि योजना का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए परिवहन, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। सभी संबंधित अधिकारियों को योजना की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने और क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने बताया कि योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अस्पतालों में सूचना बोर्ड और हाईवे के किनारे होर्डिंग लगाए जाएंगे।
डायल-112 और टीएमएस 2.0 की भूमिका पर चर्चा
कार्यशाला में डायल-112 की जिम्मेदारियों, टीएमएस 2.0 पोर्टल पर दुर्घटना पीड़ितों के पंजीकरण, पुलिस सत्यापन और आईरैड/ईडार प्रणाली की प्रक्रिया समझाई गई। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों की जिम्मेदारियों, कैशलेस उपचार और क्लेम प्रक्रिया पर भी प्रस्तुतीकरण दिया।
इस दौरान अधिकारियों और अन्य हितधारकों ने पंजीकरण, सत्यापन और उपचार से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा की।






















