Smartphone Exchange: पुराने फोन का क्या करती हैं कंपनियां? कैसे करती है कमाई, जानिए एक्सचेंज ऑफर का पूरा बिजनेस मॉडल

एक्सचेंज में दिए गए पुराने फोन को कंपनियां रीफर्बिश करके दोबारा बेचती हैं, उसके पार्ट्स का उपयोग करती हैं या रीसाइक्लिंग करती हैं। सही तरीके से फैक्ट्री रीसेट करने पर आपका निजी डाटा भी सुरक्षित रहता है।

Old Exchange Phones: जब कोई व्यक्ति नया स्मार्टफोन खरीदते समय अपना पुराना फोन एक्सचेंज में देता है, तो कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर उस पुराने फोन का क्या होता है। क्या उसे सीधे कबाड़ में फेंक दिया जाता है, रीसाइक्लिंग के लिए भेज दिया जाता है या फिर कंपनियां उससे कोई और फायदा उठाती हैं? इसके साथ ही कुछ लोगों को यह चिंता भी रहती है कि कहीं उनके फोन का निजी डाटा गलत हाथों में तो नहीं पहुंच सकता।

असल में, एक्सचेंज में लिया गया फोन सीधे स्क्रैप में नहीं जाता। सबसे पहले उसकी जांच की जाती है और उसकी स्थिति के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय की जाती है। यही वजह है कि पुराने स्मार्टफोन भी कंपनियों के लिए एक मूल्यवान संपत्ति बन जाते हैं।

रीफर्बिश करके दोबारा बेचे जाते हैं फोन

अगर फोन अच्छी हालत में होता है, तो उसे रिपेयर करके फिर से बेच दिया जाता है। इसमें बैटरी बदलना, स्क्रीन ठीक करना या सॉफ्टवेयर अपडेट करना जैसे छोटे-मोटे काम किए जाते हैं। इसके बाद ऐसे फोन को “रीफर्बिश्ड” या “रिन्यूड” डिवाइस के रूप में बाजार में उतारा जाता है।

आज भारत में रीफर्बिश्ड स्मार्टफोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। कम कीमत में अच्छी कंपनी का फोन मिलने की वजह से कई ग्राहक ऐसे डिवाइस खरीदना पसंद करते हैं। इससे कंपनियों को भी पुराने फोन से दोबारा कमाई का मौका मिल जाता है।

फोन के पार्ट्स से भी होती है कमाई

हर पुराना फोन दोबारा बेचने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे मामलों में कंपनियां उसके काम आने वाले पार्ट्स अलग कर लेती हैं। डिस्प्ले, कैमरा, स्पीकर, मदरबोर्ड और चार्जिंग पोर्ट जैसे हिस्सों का इस्तेमाल दूसरे खराब फोन को ठीक करने में किया जा सकता है।

इस प्रक्रिया से रिपेयर इंडस्ट्री को कम कीमत पर पार्ट्स मिल जाते हैं। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कचरा यानी ई-वेस्ट भी कम होता है, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद माना जाता है।

खराब फोन में भी छिपी होती है कीमत

कई लोग सोचते हैं कि पूरी तरह खराब हो चुका फोन किसी काम का नहीं होता, लेकिन ऐसा नहीं है। पुराने स्मार्टफोन के अंदर सोना, चांदी, तांबा और पैलेडियम जैसे कीमती धातुओं की थोड़ी मात्रा मौजूद होती है।

जब बड़ी संख्या में ऐसे फोन इकट्ठा हो जाते हैं, तो उन्हें रीसाइक्लिंग प्लांट में भेजा जाता है। वहां इन धातुओं को निकालकर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि बेकार दिखने वाले फोन की भी कुछ न कुछ कीमत बनी रहती है।

एक्सचेंज ऑफर का असली फायदा

फोन एक्सचेंज प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य नए स्मार्टफोन की बिक्री बढ़ाना होता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी नए फोन की कीमत 30 हजार रुपये है और ग्राहक को पुराने फोन के बदले 8 से 10 हजार रुपये तक की छूट मिल जाती है, तो नया फोन खरीदना आसान लगने लगता है।

इस तरह कंपनियां एक ओर नया फोन बेचती हैं और दूसरी ओर पुराने फोन से भी अलग-अलग तरीकों से कमाई कर लेती हैं।

क्या आपका डाटा सुरक्षित रहता है?

आमतौर पर कंपनियों का उद्देश्य ग्राहकों का निजी डाटा हासिल करना नहीं होता। उनका पूरा कारोबार डिवाइस, उसके पार्ट्स और रीफर्बिशिंग पर आधारित होता है। फिर भी सुरक्षा के लिए फोन एक्सचेंज करने से पहले सभी अकाउंट लॉगआउट करना, जरूरी डाटा का बैकअप लेना और फोन को फैक्ट्री रीसेट करना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से आपका निजी डाटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और किसी भी तरह की परेशानी की संभावना काफी कम हो जाती है।

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