Big Claim: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उपचुनाव के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा आरोप लगाया है। उनका दावा है कि बीजेपी ने कुछ विधानसभा उपचुनावों में जानबूझकर हार स्वीकार की ताकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर उठ रहे विपक्ष के सवाल कमजोर पड़ जाएं। उनका कहना है कि अगर हर चुनाव में बीजेपी जीतती रहती तो EVM पर विपक्ष के आरोप और तेज हो जाते, इसलिए पार्टी ने रणनीति के तहत कुछ सीटों पर हार का रास्ता चुना।
क्या बोले अखिलेश
अखिलेश यादव ने कहा कि बांकीपुर और दतिया जैसे उपचुनावों में बीजेपी ने वह चुनावी मॉडल नहीं अपनाया, जिसका इस्तेमाल वह पहले कुछ अन्य चुनावों में करती रही है। उनके अनुसार, ऐसा इसलिए किया गया ताकि जनता को यह संदेश दिया जा सके कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होते हैं और EVM पर उठ रहे सवालों की धार कमजोर पड़ जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने अखिलेश यादव के आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक बयानबाजी बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होते हैं और हार-जीत जनता के फैसले से तय होती है। भाजपा का कहना है कि विपक्ष अपनी हार और राजनीतिक कमजोरियों को छिपाने के लिए लगातार EVM और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। पार्टी ने यह भी कहा कि जनता विकास और काम के आधार पर वोट देती है, किसी साजिश के आधार पर नहीं।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान केवल उपचुनाव तक सीमित नहीं है। इसके जरिए वह आगामी बड़े चुनावों से पहले EVM और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाना चाहते हैं। दूसरी ओर बीजेपी इसे विपक्ष की निराशा और हार की मानसिकता बता रही है। ऐसे आरोपों से राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म होने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ जनता के बीच जा रहे हैं।
आगे क्या असर होगा
आने वाले महीनों में कई राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में EVM, चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्ष मतदान जैसे मुद्दे फिर चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं। हालांकि अब तक अखिलेश यादव के इस दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है और चुनाव आयोग भी लगातार EVM प्रणाली को सुरक्षित और विश्वसनीय बताता रहा है। ऐसे में यह मामला फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बना हुआ है और इस पर बहस जारी रहने की संभावना है।








