BSP Politics: मायावती का बड़ा फैसला, आकाश आनंद को किया किनारे , किसके लिए कहां अभी मैच्योर नहीं

बसपा प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद को फिलहाल पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देने से इनकार कर दिया है। लखनऊ की बैठक में आकाश को नहीं बुलाया गया, जबकि छोटे भाई ईशान आनंद पहली बार प्रमुख मंच पर दिखे।

Mayawati’s Big Decision: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय स्तर की बैठक में आकाश आनंद को शामिल नहीं किया गया। मायावती ने साफ कहा कि आकाश को अभी राजनीतिक तौर पर और परिपक्व होने की जरूरत है। जब तक वह पर्याप्त मैच्योर नहीं होते, तब तक उन्हें पार्टी की कोई बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा।

बड़ी जिम्मेदारी पर रोक

मायावती ने कहा कि चुनावी राजनीति में विरोधी अलग-अलग तरह के हथकंडे अपनाते हैं। ऐसे समय में पार्टी की अहम जिम्मेदारी ऐसे नेता को देना ठीक नहीं होगा, जिसे अभी राजनीतिक अनुभव और परिपक्वता हासिल करनी बाकी है। इसलिए आकाश को पार्टी में काम करने की अनुमति तो रहेगी, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। यह फैसला यूपी समेत कई राज्यों में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच आया है।

आकाश का सियासी सफर

आकाश आनंद का राजनीतिक सफर लगातार उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। दिसंबर 2023 में मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसके बाद उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिली और युवा चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया गया। लेकिन मई 2024 में मायावती ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारियों से हटा दिया। बाद में उनकी वापसी हुई, मगर मार्च 2025 में फिर कार्रवाई हुई। इसके बाद उन्हें दोबारा संगठन में अहम भूमिका मिली थी। अब एक बार फिर उनकी बड़ी जिम्मेदारी पर रोक लगा दी गई है।

ईशान की पहली बड़ी मौजूदगी

इस पूरे घटनाक्रम में आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद की मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा में है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ईशान पहली बार पार्टी के आधिकारिक बड़े मंच पर नजर आए। वह अपने पिता आनंद कुमार के साथ बैठे थे और मायावती के साथ भी दिखाई दिए। ईशान पहले भी कुछ मौकों पर पार्टी कार्यक्रमों में नजर आ चुके हैं, लेकिन इस बार उनकी मौजूदगी को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि उसी बैठक में आकाश अनुपस्थित रहे।

2027 पर मायावती की नजर

मायावती का ताजा फैसला ऐसे समय में आया है, जब बसपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में संगठन और चुनावी रणनीति की समीक्षा शुरू कर दी है। मायावती ने यह भी संकेत दिया है कि बसपा छोटे-बड़े चुनाव अपने दम पर लड़ने की दिशा में आगे बढ़ेगी। ऐसे में आकाश को पीछे करने और ईशान को मंच पर जगह मिलने से बसपा की अगली पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।

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