Constitution Amendment :मॉनसून सत्र से पहले दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य पर एनडीए की नजर, महिला आरक्षण, एक देश-एक चुनाव भी चर्चा में

एनडीए सरकार को उम्मीद है कि संसद के आगामी मॉनसून सत्र तक वह संविधान संशोधन के लिए जरूरी संख्या जुटा लेगी। महिला आरक्षण, परिसीमन और एक देश-एक चुनाव जैसे बड़े मुद्दे राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं।

NDA Constitution Amendment Plan: देश की राजनीति में विपक्षी दलों के भीतर लगातार सामने आ रही टूट और असंतोष की खबरों के बीच केंद्र की एनडीए सरकार काफी आत्मविश्वास में दिखाई दे रही है। सरकार को उम्मीद है कि अगले महीने शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र तक वह संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक समर्थन हासिल कर सकती है।।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि संसद में संख्या बल बढ़ने से लंबे समय से लंबित कुछ बड़े राजनीतिक और संवैधानिक फैसलों को आगे बढ़ाने का रास्ता आसान हो सकता है।

एजेंडे में शामिल हैं बड़े बदलाव

सरकार जिन महत्वपूर्ण संविधान संशोधनों पर आगे बढ़ना चाहती है, उनमें महिला आरक्षण और नए परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव प्रमुख माना जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत महिला आरक्षण को लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया से जोड़ने की बात कही जा रही है। सरकार का मानना है कि देश में बढ़ती आबादी और बदलते जनसंख्या संतुलन को देखते हुए सीटों की संख्या और सीमाओं की समीक्षा जरूरी हो गई है। इसी वजह से परिसीमन को एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

एक देश-एक चुनाव पर भी फोकस

भारतीय जनता पार्टी की नजर “एक देश-एक चुनाव” की योजना पर भी बनी हुई है। पार्टी चाहती है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बार-बार चुनाव होने से होने वाली परेशानियां भी घटेंगी। साथ ही राष्ट्रीय मुद्दों पर एक साथ जनमत लेने में भी सुविधा होगी।

लोकसभा में क्या है संख्या का गणित?

वर्तमान लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। इसके लिए बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन आवश्यक है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विभिन्न विपक्षी दलों के कुछ सांसद भविष्य में अपना रुख बदल सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी सत्तापक्ष को भरोसा है कि आने वाले समय में उसका समर्थन आधार और मजबूत हो सकता है।

राज्यसभा में भी मजबूत होती स्थिति

राज्यसभा में भी एनडीए की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत मानी जा रही है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और कुछ दलों के भीतर चल रही हलचल के कारण सत्तापक्ष का मनोबल बढ़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार दोनों सदनों में पर्याप्त समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है।

विपक्ष ने जताई चिंता

दूसरी ओर विपक्षी दल परिसीमन और अन्य प्रस्तावित बदलावों को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि भविष्य में होने वाले परिसीमन का असर कई राज्यों और निर्वाचन क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरण पर पड़ सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है। सरकार का कहना है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों की समीक्षा और पुनर्गठन लोकतांत्रिक व्यवस्था की एक सामान्य प्रक्रिया है। आने वाले मॉनसून सत्र में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।Title: संविधान संशोधन पर एनडीए की नजर, महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर बढ़ी सियासी सरगर्मी

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