Parliament Monsoon Session:संसद का मानसून सत्र इस बार काफी अहम माना जा रहा है। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश करने और पारित कराने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतर रहा है। ऐसे में दोनों सदनों में तीखी बहस, विरोध और हंगामे के आसार पहले से ही नजर आ रहे हैं। विदेशी फंडिंग, उच्च शिक्षा, न्यायपालिका, कर व्यवस्था और MSME जैसे कई बड़े विषय इस सत्र के एजेंडे में शामिल हैं।
FCRA और शिक्षा सुधार से जुड़े बड़े प्रस्ताव
सरकार विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए विदेशी फंडिंग व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार जिन संस्थाओं का FCRA प्रमाणपत्र समाप्त हो जाएगा, उसका नवीनीकरण नहीं होगा या सरकार नवीनीकरण से इनकार करेगी, उनका पंजीकरण रद्द किया जा सकेगा। वहीं विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 के माध्यम से उच्च शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव है। यह विधेयक UGC, AICTE और NCTE की जगह नया नियामक ढांचा स्थापित करने की दिशा में कदम माना जा रहा है। इसके तहत राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को भी नए ढांचे में शामिल करने का प्रस्ताव है। हालांकि धारा 15(3)(जी) को लेकर विपक्ष और शिक्षा विशेषज्ञों ने केंद्र सरकार के बढ़ते अधिकारों पर सवाल उठाए हैं।
सरकार ने रखा अपना पक्ष, कई अन्य विधेयकों पर भी नजर
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि प्रस्तावित प्रावधान मौजूदा कानूनी व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं करते। फिलहाल यह विधेयक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास विचाराधीन है। इसके अलावा सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेगी, जिसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत के ऋण बाजार को मजबूत बनाना और निवेश आकर्षित करना है। सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को विधायी मंजूरी देने का प्रस्ताव है।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण और MSME सुधार पर रहेगा फोकस
मानसून सत्र में पंजीकरण एवं मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश किया जाएगा। इसके तहत विलंब से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने का प्रस्ताव है। राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े कानून को और मजबूत करने की तैयारी है। वहीं MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए कारोबार को आसान बनाने, भुगतान में देरी कम करने और राज्यों को अधिक प्रशासनिक लचीलापन देने पर केंद्रित रहेगा।
विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में
सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष भी कई अहम मुद्दों पर जवाब मांगने की तैयारी कर चुका है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे सदन में NEET-UG पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर चंदा गबन समेत कई राष्ट्रीय मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाएंगे। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, बहस और हंगामे की संभावना बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार अपने विधेयकों को कितनी सहजता से आगे बढ़ा पाती है और विपक्ष उन्हें किस तरह चुनौती देता है।


