Parliament Update : संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बना हुआ है। विपक्ष दो प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रहा है। पहला मुद्दा 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर पेलेट गन और कील लगी लाठियों के इस्तेमाल का है। विपक्ष चाहता है कि गृह मंत्री सदन में आकर इस मामले पर बयान दें और पूरी स्थिति स्पष्ट करें।
राम मंदिर चंदा मामला
दूसरा बड़ा मुद्दा अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी का है, जिसे समाजवादी पार्टी लगातार उठा रही है। पार्टी के सांसद प्रतिदिन एक दान पेटी लेकर संसद पहुंचते हैं। सभी विपक्षी सांसद उसमें स्वेच्छा से योगदान देते हैं। इसके बाद गमछा बिछाकर सबके सामने चंदे की गिनती की जाती है और पूरी राशि अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद को सौंप दी जाती है, ताकि वह इसे राम मंदिर के दानपात्र में जमा करा सकें। सोमवार को इस अभियान के तहत करीब 47 हजार रुपये एकत्र हुए।
बीएसी बैठक भी बेनतीजा
विपक्ष इन दोनों मुद्दों पर चर्चा और गृह मंत्री के बयान की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर सरकार इन मांगों को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं दिख रही है। इसी कारण संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक हुई, लेकिन वहां भी सरकार और विपक्ष के बीच किसी प्रकार की सहमति नहीं बन सकी।
विवादित बिलों पर सरकार की रणनीति
सरकार इस सप्ताह तीन नए विधेयक लाना चाहती है, लेकिन विदेशी चंदे से जुड़े धार्मिक संगठनों पर प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक का फिलहाल कोई उल्लेख नहीं किया गया। दक्षिण भारत की कई राजनीतिक पार्टियां इस विधेयक का विरोध कर रही हैं। माना जा रहा है कि सरकार फिलहाल ऐसे किसी विवादित विषय को आगे बढ़ाने से बच रही है ताकि संसद में टकराव और न बढ़े।
अंतिम सप्ताह में आ सकता है परिसीमन बिल
संसद के गलियारों में चर्चा है कि सरकार मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में विवादित विधेयकों को पेश करने की रणनीति बना रही है। इनमें बहुचर्चित परिसीमन (Delimitation) विधेयक भी शामिल बताया जा रहा है। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को डीएमके जैसे सहयोगी दलों के समर्थन की आवश्यकता हो सकती है। साथ ही यह भी चर्चा है कि 15 अगस्त के बाद तीन दिन का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक को पारित कराने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।









