Parliament Special Session on Delimitation:केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के एक टीवी इंटरव्यू में परिसीमन विधेयक को लेकर दिए बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। खरगे ने मांग की है कि परिसीमन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर फैसला लेने से पहले सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों के साथ सर्वदलीय बैठक की जाए।
सीटों पर रोक
खरगे ने अपनी चिट्ठी में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक फ्रीज रखने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों के आधार पर लोकसभा सीटों के मौजूदा आवंटन को भी इसी अवधि के लिए स्थिर रखने की बात कही है। उनका तर्क है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक विषय पर व्यापक सहमति जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी नए विधेयक को संसद में पेश करने से पहले विपक्षी दलों को प्रस्तावित मसौदे का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
महिला आरक्षण लागू
कांग्रेस अध्यक्ष ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर भी सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। खरगे चाहते हैं कि 2029 में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलना शुरू हो जाए। उनका कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़कर आगे टालने के बजाय इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए।
विशेष सत्र पर सवाल
खरगे ने अपने पत्र में 16 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री को भेजे गए पिछले पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री के हालिया टीवी इंटरव्यू से ऐसी आशंका मजबूत हुई है कि परिसीमन से संबंधित नया विधेयक लाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इसी वजह से संसद के मॉनसून सत्र का सत्रावसान लगातार टाला जा रहा है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
बहुमत का गणित
परिसीमन की राजनीति के बीच संसद में सरकार के बहुमत का गणित भी चर्चा में है। दिए गए विवरण के मुताबिक, 17 अप्रैल 2026 को बजट सत्र के दौरान मोदी सरकार का 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई समर्थन हासिल नहीं कर पाया था। 528 सांसदों में 298 ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया था। हालांकि, इसके बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव हुआ है।
बदले राजनीतिक समीकरण
पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के सात सांसदों के भाजपा में शामिल होने और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के बाद लोकसभा के 20 सांसदों द्वारा अलग गुट बनाने की चर्चा ने सरकार की स्थिति को लेकर नए समीकरण खड़े किए हैं। इसके अलावा सरकार को डीएमके और शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी से भी इस मुद्दे पर समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में परिसीमन का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।
