PM Modi secretaries meeting:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सभी मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने सरकारी कामकाज में बेहतर समन्वय और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के विभिन्न विभागों के बीच बने साइलोज को खत्म करना जरूरी है। साइलोज से मतलब ऐसी स्थिति से है, जब अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर काम करते हैं और उनके बीच पर्याप्त संवाद या समन्वय नहीं रहता। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा हो, संपर्क व्यवस्था हो या राष्ट्रीय सुरक्षा, हर क्षेत्र में भविष्य को ध्यान में रखकर लंबी अवधि की योजना बनानी होगी।
कोरोना काल से सीख
प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय संकट से निपटने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों ने मिलकर काम किया था। उन्होंने अधिकारियों से इसी सोच को सामान्य परिस्थितियों में भी अपनाने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक-दूसरे को साथ लेकर चलना और जरूरत पड़ने पर लगातार विचार-विमर्श करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि विभागों के बीच दूरी या औपचारिकता कामकाज में बाधा नहीं बननी चाहिए। लंबी अवधि की योजनाओं पर काम करते समय अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी और उसके दूरगामी प्रभावों का भी ध्यान रखना होगा।
एआई और डेटा पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय की जरूरतों को देखते हुए सरकारी कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को बढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही नवाचार को प्रोत्साहित करने की जरूरत है, ताकि एआई के क्षेत्र में देश के लोगों और संस्थानों में विशेषज्ञता विकसित हो सके। उन्होंने डेटा को भी राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए उसके बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के मुताबिक भविष्य में डेटा एक महत्वपूर्ण संसाधन बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि सभी विभाग मिलकर डेटा के इस्तेमाल और प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था तैयार करें।
उद्योगों से बेहतर संपर्क
पीएमओ की ओर से जारी बयान के अनुसार प्रधानमंत्री ने विनिर्माण इकाइयों और निर्यात केंद्रित इकाइयों के बीच बेहतर संपर्क बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी मंत्रालय एक ही सरकार का हिस्सा हैं, इसलिए उनके कामकाज में अलग-अलग सोच के बजाय साझा और समन्वित दृष्टिकोण होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को अपने साथ काम करने वाले कर्मचारियों और कनिष्ठ अधिकारियों से केवल औपचारिक बातचीत तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने सामान्य और व्यक्तिगत संवाद बढ़ाने तथा अलग-अलग कैडर और विभागों के बीच मजबूत नेटवर्क बनाने को भी जरूरी बताया।
बंदरगाह आधारित विकास
प्रधानमंत्री ने भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे की क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को केवल बंदरगाहों के विकास तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बंदरगाह आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इसके लिए विनिर्माण और निर्यात उन्मुख इकाइयों के बीच बेहतर संपर्क जरूरी है। बैठक में सचिवों ने सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं और उन्हें लागू करने के दौरान आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार भी साझा किए। प्रधानमंत्री ने सभी विभागों से मिलकर काम करने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीतियां तैयार करने पर जोर दिया।
