Rajya Sabha Election Results 2026: 18 जून को 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव संपन्न हुए। इन चुनावों के बाद उच्च सदन का नया राजनीतिक गणित सामने आ गया है। चुनाव नतीजों ने एक बार फिर भाजपा और एनडीए की ताकत को मजबूत किया है, जबकि विपक्षी दलों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। हालांकि कांग्रेस को इस चुनाव में तीन सीटों का फायदा मिला है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी राज्यसभा में भाजपा से काफी पीछे बनी हुई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस की सीटें बढ़कर 30 हो गई हैं, जबकि भाजपा 116 सीटों के साथ राज्यसभा की सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। दोनों दलों के बीच अब 86 सीटों का बड़ा अंतर है।
चुनाव में एनडीए का दबदबा
हालिया चुनावों में कुल 26 सीटों में से 19 सीटें एनडीए के खाते में गईं। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को सिर्फ 6 सीटों पर जीत मिली। इसके अलावा मिजोरम में एक सीट क्षेत्रीय दल के खाते में गई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कई राज्यों में निर्विरोध जीत और कुछ जगहों पर हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का फायदा एनडीए को मिला है। इससे सत्तारूढ़ गठबंधन का मनोबल और मजबूत हुआ है।
झारखंड में कांग्रेस को झटका
झारखंड राज्यसभा चुनाव सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यहां दो सीटों पर मतदान हुआ था। राजनीतिक समीकरण कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के पक्ष में माने जा रहे थे, लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया। वहीं दूसरी सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम विजयी रहे। इस परिणाम को कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
एनडीए की बढ़ती ताकत
राज्यसभा में एनडीए की स्थिति लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। हाल के महीनों में कई राजनीतिक घटनाओं और दलों के भीतर उठापटक का असर भी सदन के संख्या बल पर पड़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत संख्या बल के कारण सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत फैसलों को आगे बढ़ाने में पहले की तुलना में अधिक आसानी हो सकती है। यही वजह है कि आगामी संसदीय सत्रों पर सभी की नजर बनी हुई है।
विपक्ष के सामने बढ़ी चुनौती
दूसरी ओर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के लिए स्थिति आसान नहीं दिख रही है। संख्या बल कम होने के कारण सरकार के खिलाफ एकजुट रणनीति बनाना विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा में प्रभाव बनाए रखने के लिए विपक्ष को सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल और मजबूत रणनीति पर काम करना होगा। फिलहाल चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि उच्च सदन में भाजपा और एनडीए पहले से अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच चुके हैं।









