Karur Stampede: तमिलनाडु के चर्चित करूर भगदड़ मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस को तेज कर दिया है। मामले में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ आरोपी, जो वर्तमान में राज्य सरकार में मंत्री हैं, गवाहों को प्रभावित करने और जांच में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं। इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है।
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि जांच पूरी होने तक इस मामले से जुड़े नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों पर रोक लगाने पर विचार किया जाए, ताकि जांच प्रभावित न हो। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
मामले की सुनवाई जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष होने की संभावना है। अदालत याचिका में लगाए गए आरोपों और जांच की स्थिति पर विचार करेगी।
क्या था करूर भगदड़ मामला?
याचिका के अनुसार, 27 सितंबर 2025 को करूर में एक राजनीतिक जनसभा के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिसमें 41 लोगों की मौत और 140 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। आरोप है कि कार्यक्रम में उम्मीद से अधिक भीड़ पहुंची थी और भीड़ प्रबंधन के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, जिससे हालात बिगड़ गए।
सीबीआई कर रही है जांच
मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। जांच की निगरानी के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी अभी सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है और मामले में अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
