I-PAC Arrest Case: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने I-PAC के को-फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। खास बात यह है कि I-PAC वही संस्था है, जो ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC के चुनावी कैंपेन को संभालती है।
कौन हैं विनेश चंदेल
विनेश चंदेल इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी यानी I-PAC के सह-संस्थापक और डायरेक्टर हैं। उन्होंने प्रशांत किशोर, प्रतीक जैन और ऋषिराज सिंह के साथ मिलकर इस संस्था को खड़ा किया था। वे कंपनी के कामकाज और फाइनेंस से जुड़े फैसलों को संभालते हैं। बंगाल में चुनावी रणनीति बनाने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है।
क्यों हुई गिरफ्तारी
ED ने उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि कोयला घोटाले से जुड़ा काला धन गलत तरीके से I-PAC तक पहुंचाया गया। इस पैसे का इस्तेमाल चुनावी कामों में किया गया। जांच में पैसों के लेन-देन के पक्के सबूत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।
हवाला नेटवर्क का खुलासा
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि करीब 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए ट्रांसफर किए गए। यह पैसा मुंबई की एक अंगड़िया फर्म के माध्यम से भेजा गया था। इसी नेटवर्क का इस्तेमाल करके अवैध पैसे को सही दिखाने की कोशिश की गई। यह खुलासा मामले को और गंभीर बना देता है।
ममता बनर्जी से जुड़ा मामला
इस केस ने तब और तूल पकड़ लिया, जब जनवरी में कोलकाता स्थित I-PAC ऑफिस पर छापेमारी हुई थी। उस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंची थीं। आरोप है कि वे कुछ अहम दस्तावेज अपने साथ ले गई थीं, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। चंदेल की गिरफ्तारी से अब उनकी चुनावी रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।
ED की लगातार कार्रवाई
विनेश चंदेल की गिरफ्तारी से पहले ED ने कई शहरों में छापेमारी की थी। दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में I-PAC से जुड़े लोगों के ठिकानों पर तलाशी ली गई। यह पूरा मामला साल 2020 में दर्ज CBI की FIR से जुड़ा है, जिसमें कोयला चोरी का बड़ा आरोप लगाया गया था।
चुनाव पर पड़ सकता है असर
इस कार्रवाई का असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है। क्योंकि I-PAC चुनावी रणनीति बनाने में बड़ी भूमिका निभाती है। ऐसे में इस गिरफ्तारी से TMC की तैयारियों पर असर पड़ने की चर्चा तेज हो गई है।

